आंधी और बारिश ने सीमांचल के खेतों को उजाड़ दिया, अब किसानों की उम्मीद संसद से जुड़ी है। लोकसभा में उठी आवाज ने सवाल खड़ा कर दिया है—क्या इस बार मिलेगी राहत या फिर हर साल की तरह दर्द ही मिलेगा?
नई दिल्ली/अररिया: सीमांचल क्षेत्र में हालिया आंधी और तेज बारिश से हुई भारी तबाही का मुद्दा शुक्रवार को लोकसभा में जोरदार तरीके से उठा। अररिया से सांसद प्रदीप कुमार सिंह ने शून्यकाल के दौरान इस संकट को गंभीर बताते हुए केंद्र सरकार से सीमांचल को राष्ट्रीय आपदा प्रभावित कृषि जोन घोषित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि इस प्राकृतिक आपदा ने क्षेत्र में व्यापक जान-माल का नुकसान किया है और हजारों किसानों की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है।
आपदा से तबाह खेती, बढ़ी किसानों की चिंता
सांसद ने सदन को बताया कि सीमांचल, खासकर अररिया, पहले से ही बाढ़ और जलभराव जैसी स्थायी समस्याओं से जूझ रहा है। कोसी और परमान जैसी नदियों के कारण हर साल लाखों हेक्टेयर कृषि भूमि प्रभावित होती है। इस बार आई आंधी-बारिश ने हालात और बिगाड़ दिए हैं, जिससे धान, मक्का और जूट की फसलें पूरी तरह नष्ट हो गई हैं। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति पर गहरा असर पड़ा है।
केंद्र से त्वरित राहत और विशेष पैकेज की मांग
सांसद ने केंद्र सरकार से मांग की कि हालिया आपदा से हुई क्षति का तत्काल आकलन कर प्रभावित किसानों को शीघ्र मुआवजा दिया जाए। साथ ही सीमांचल क्षेत्र के समग्र विकास के लिए विशेष आर्थिक पैकेज घोषित किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को सरल और प्रभावी बनाया जाए ताकि किसानों को समय पर लाभ मिल सके।
स्थायी समाधान नहीं तो गहराएगा संकट
सांसद ने चेतावनी दी कि यदि बाढ़ और जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला गया तो सीमांचल गंभीर आर्थिक संकट की ओर बढ़ सकता है। उन्होंने सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने और तटबंधों के सुदृढ़ीकरण के लिए विशेष अनुदान देने की भी मांग की।
सदन में अपनी बात रखते हुए उन्होंने स्पष्ट कहा कि सीमांचल की अर्थव्यवस्था पूरी तरह कृषि पर निर्भर है और लगातार आपदाओं के कारण यहां के किसानों की हालत दयनीय होती जा रही है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से इस दिशा में तत्काल ठोस कार्रवाई करने का आग्रह किया, ताकि क्षेत्र के किसानों को राहत मिल सके और पलायन की बढ़ती समस्या पर भी रोक लगाई जा सके।
