अररिया में चैत मास की शुक्ल नवमी पर मनाई जाने वाली रामनवमी के अवसर पर शुक्रवार को भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरी इस शोभायात्रा में पांच हजार से अधिक रामभक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी, जिससे पूरा शहर भगवा रंग में रंगा नजर आया। आयोजन के दौरान धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक सौहार्द की अनूठी तस्वीर भी सामने आई। 
शहर बना भगवा, हर रास्ता जय श्रीराम के उद्घोष से गूंजा
शोभायात्रा की शुरुआत संकट मोचन हनुमान मंदिर, बस स्टैंड रोड से हुई, जो मारवाड़ी पट्टी, नवरत्न चौक, एडीबी चौक, चांदनी चौक, ठाकुरवाड़ी मोड़, सोनार पट्टी, माता स्थान, काली मंदिर, महिला कॉलेज, आश्रम चौक और महादेव चौक होते हुए पुनः मंदिर परिसर में समाप्त हुई।
पूरे मार्ग में भगवा झंडों और बैनरों से सजा शहर धार्मिक उत्साह से सराबोर दिखा। हर ओर “जय श्रीराम” के जयघोष गूंजते रहे। जगह-जगह श्रद्धालुओं ने शोभायात्रा का स्वागत किया और माहौल को भक्तिमय बना दिया।
सौहार्द की मिसाल: मुस्लिम समुदाय ने पिलाया शरबत
इस आयोजन की खास बात रही गंगा-जमुनी तहजीब, जहां विभिन्न समुदायों ने मिलकर भाईचारे का संदेश दिया।
शहर के कई स्थानों पर शरबत और पानी के स्टॉल लगाए गए। काली मंदिर चौक पर नगर परिषद द्वारा स्टॉल लगाया गया, वहीं मुस्लिम समुदाय के लोगों ने भी शोभायात्रा में शामिल श्रद्धालुओं को शरबत पिलाकर सामाजिक एकता की मिसाल पेश की।
इस पहल ने धार्मिक आयोजन को केवल आस्था तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे सामाजिक सद्भाव का प्रतीक बना दिया।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम, हर चौक पर पुलिस तैनात
शोभायात्रा को शांतिपूर्ण और सुरक्षित संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा।
हर चौक-चौराहे पर मजिस्ट्रेट और पुलिस बल की तैनाती की गई थी। जिला पदाधिकारी बिनोद दुहन और पुलिस अधीक्षक जितेंद्र कुमार कंट्रोल रूम से सीसीटीवी के जरिए पूरे शहर की निगरानी करते रहे।
शोभायात्रा के आगे-आगे अनुमंडल पदाधिकारी, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी और नगर थाना पुलिस भीड़ को नियंत्रित करते नजर आए। चांदनी चौक पर यातायात डीएसपी भी सक्रिय दिखे और रास्तों को क्लियर कराते रहे।
इस सख्त निगरानी के कारण पूरे आयोजन के दौरान कहीं से किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।
भंडारा में उमड़ी भीड़, घंटों कतार में लगे भक्त
शोभायात्रा के समापन के बाद आयोजन समिति द्वारा महा भंडारा का आयोजन किया गया। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु कतार में खड़े होकर अपने क्रम का इंतजार करते नजर आए।
भंडारे का दृश्य अनुशासन और आस्था का संगम प्रतीत हुआ, जहां हर वर्ग के लोग एक साथ प्रसाद ग्रहण करते दिखे।
कुल मिलाकर, अररिया में इस बार की रामनवमी आस्था, व्यवस्था और सामाजिक एकता का बड़ा उदाहरण बनकर उभरी, जिसने शहर की सांस्कृतिक पहचान को और मजबूत किया।
