अररिया जिले के फारबिसगंज स्थित आरबी लेन के तेरापंथ भवन में आचार्य महाश्रमण के निर्देशानुसार तेरापंथ स्थापना दिवस एवं गुरु पूर्णिमा का कार्यक्रम श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुंबई से आए उपासकों के सानिध्य में धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। साथ ही आगामी 50 दिनों तक विशेष आध्यात्मिक एवं व्यक्तित्व विकास कार्यक्रम आयोजित करने की घोषणा की गई।
फारबिसगंज (अररिया)। अररिया जिले के फारबिसगंज शहर अंतर्गत आरबी लेन स्थित तेरापंथ भवन में तेरापंथ धर्मसंघ के अनुशास्ता आचार्य महाश्रमण के निर्देशानुसार तेरापंथ स्थापना दिवस एवं गुरु पूर्णिमा का कार्यक्रम श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण के बीच संपन्न हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागिता की। इस अवसर पर मुंबई से आए उपासक सुधांशु चिंडालिया एवं प्रकाश जैन की विशेष उपस्थिति रही।
कार्यक्रम के दौरान गुरु वंदना, धार्मिक प्रवचन, सामूहिक आराधना तथा आध्यात्मिक चिंतन के माध्यम से श्रद्धालुओं ने गुरु पूर्णिमा एवं तेरापंथ स्थापना दिवस के महत्व को आत्मसात किया। आयोजकों के अनुसार यह आयोजन समाज में नैतिक मूल्यों, अनुशासन और आध्यात्मिक चेतना को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया।
आत्मोत्थान और आचार की शुद्धता पर दिया गया बल
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रकाश जैन ने तेरापंथ स्थापना दिवस के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आद्य प्रवर्तक आचार्य भिक्षु का उद्देश्य किसी नए संप्रदाय की स्थापना करना नहीं था, बल्कि समाज में आचार-विचार की शुद्धता, आत्मोत्थान और नैतिक जीवन मूल्यों को स्थापित करना था।
उन्होंने कहा कि सत्य, अहिंसा, संयम और अनुशासित जीवन शैली के कारण आचार्य भिक्षु के विचार समाज में व्यापक रूप से स्वीकार किए गए। यही कारण है कि तेरापंथ धर्मसंघ आज अनुशासन और संगठनात्मक व्यवस्था के लिए अपनी अलग पहचान रखता है।
मर्यादा, अनुशासन और अणुव्रत आंदोलन की विशेषता
उपासक सुधांशु चिंडालिया ने तेरापंथ धर्मसंघ की प्रमुख विशेषताओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मर्यादा और अनुशासन इस धर्मसंघ की सबसे बड़ी शक्ति है। अणुव्रत आंदोलन के माध्यम से नैतिक मूल्यों का प्रचार-प्रसार किया गया है, जबकि प्रेक्षाध्यान और जीवन विज्ञान जैसी विधाओं को देश-विदेश में अपनाया जा रहा है।
उन्होंने समण-समणी परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके माध्यम से जैन दर्शन एवं आध्यात्मिक विचारों का प्रसार विभिन्न देशों तक पहुंच रहा है। उन्होंने आचार्य भिक्षु के दया, दान, विवेक और नैतिक आचरण से जुड़े प्रेरक प्रसंगों के माध्यम से श्रद्धालुओं को जीवन मूल्यों का संदेश दिया।
कार्यक्रम के दौरान जानकारी दी गई कि जैन श्वेतांबर तेरापंथ महासभा के तत्वावधान में ऐसे क्षेत्रों में उपासकों को भेजा जाता है, जहां चातुर्मास के दौरान साधु-साध्वी नहीं पहुंच पाते। इसी क्रम में फारबिसगंज में आगामी 50 दिनों तक विशेष आध्यात्मिक कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे।
इन कार्यक्रमों में नियमित प्रवचन, जैन विद्या कक्षाएं, प्रेक्षाध्यान, प्रतिक्रमण, योग सत्र तथा युवाओं के लिए व्यक्तित्व विकास शिविर आयोजित किए जाएंगे। आयोजकों का कहना है कि इन गतिविधियों का उद्देश्य समाज में नैतिक जागरूकता, आध्यात्मिक चेतना और सकारात्मक जीवन मूल्यों को बढ़ावा देना है।
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं ने आचार्य महाश्रमण के प्रति अपनी श्रद्धा एवं कृतज्ञता व्यक्त करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।