भारतीय जनता पार्टी ने 25 जून को आपातकाल की घोषणा के दिन को “काला दिवस” के रूप में मनाया। इस मौके पर अररिया सांसद प्रदीप कुमार सिंह ने कहा कि वर्ष 1975 में लगाया गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना है, जिसमें नागरिक अधिकारों, प्रेस की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर गंभीर प्रभाव पड़ा था।
अररिया। अररिया में आयोजित कार्यक्रम के दौरान सांसद प्रदीप कुमार सिंह ने कहा कि 25 जून 1975 को देश में लागू किया गया आपातकाल लोकतंत्र के लिए चुनौती का समय था। उन्होंने कहा कि उस दौर में संविधान द्वारा दिए गए कई मौलिक अधिकार प्रभावित हुए और प्रेस की स्वतंत्रता पर भी प्रतिबंध लगाए गए।
उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान बड़ी संख्या में राजनीतिक कार्यकर्ताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और लोकतंत्र समर्थक लोगों को जेल भेजा गया। सांसद ने इसे भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था की मूल भावना के विपरीत बताया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें नागरिक स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की आजादी और संस्थाओं की स्वतंत्रता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। सांसद ने कहा कि देश के लोकतंत्र सेनानियों ने कठिन परिस्थितियों में संघर्ष कर लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की। उनके संघर्ष के कारण वर्ष 1977 में देश में सत्ता परिवर्तन हुआ और लोकतांत्रिक व्यवस्था फिर मजबूत हुई।
लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा पर दिया जोर
प्रदीप कुमार सिंह ने कहा कि आपातकाल की घटनाओं से नई पीढ़ी को सीख लेने की जरूरत है। उन्होंने युवाओं से संविधान, लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों के महत्व को समझने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए प्रत्येक नागरिक की भागीदारी जरूरी है। लोकतांत्रिक संस्थाओं का सम्मान और संविधान की भावना का पालन देश की प्रगति के लिए आवश्यक है। सांसद ने कहा कि वर्तमान समय में लोकतांत्रिक मूल्यों, सुशासन और संविधान की भावना को प्राथमिकता देते हुए देश आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि इतिहास की घटनाओं से सीख लेकर भविष्य में लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए सतर्क रहना चाहिए। कार्यक्रम के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने आपातकाल के विरोध में विचार व्यक्त किए और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने का संकल्प लिया।