संघर्ष और मेहनत के बल पर लकड़ी फर्नीचर निर्माण के क्षेत्र में पहचान बनाने वाले मो० साबिर ने सरकारी सहायता से अपने व्यवसाय को नई दिशा दी है। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के तहत मिली वित्तीय सहायता से उन्होंने आधुनिक मशीनरी स्थापित कर जूसी फर्नीचर इकाई का विस्तार किया और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ाए।
अररिया: अररिया जिले के मो० साबिर लकड़ी फर्नीचर निर्माण के क्षेत्र में लंबे समय से कार्य कर रहे हैं। मैट्रिक तक शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने बढ़ई कार्य को अपना व्यवसाय बनाया और वर्षों के अनुभव से इस क्षेत्र में तकनीकी दक्षता हासिल की। हालांकि पर्याप्त पूंजी के अभाव में वे अपने व्यवसाय को बड़े स्तर पर विकसित नहीं कर पा रहे थे।
वर्ष 2025 में उन्हें प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के अंतर्गत आर्थिक सहायता प्राप्त हुई। इस योजना के तहत उन्हें कुल 28.50 लाख रुपये की सहायता मिली, जिसमें 4.75 लाख रुपये अनुदान राशि शामिल थी। इस वित्तीय सहयोग का उपयोग उन्होंने आधुनिक मशीनों की खरीद और कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करने में किया।
सहायता राशि मिलने के बाद मो० साबिर ने अपनी इकाई जूसी फर्नीचर में अत्याधुनिक सीएनसी राउटर मशीन स्थापित की। इस मशीन के माध्यम से अब वे ग्राहकों की मांग के अनुसार आधुनिक डिजाइन और बेहतर गुणवत्ता वाले फर्नीचर तैयार कर रहे हैं। तकनीक के इस्तेमाल से उत्पादन क्षमता में वृद्धि हुई है और बाजार में उनके उत्पादों की मांग भी बढ़ी है।
व्यवसाय विस्तार से बढ़े रोजगार के अवसर
जूसी फर्नीचर इकाई में लकड़ी के विभिन्न प्रकार के फर्नीचर तैयार किए जाते हैं। यहां कुशल कारीगरों की मदद से डिजाइनर फर्नीचर निर्माण का कार्य किया जाता है। तैयार उत्पादों की बिक्री अररिया जिले के अलावा आसपास के क्षेत्रों में भी की जा रही है।
व्यवसाय के विस्तार के साथ मो० साबिर ने करीब 15 लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया है। इससे स्थानीय युवाओं और कारीगरों को काम का अवसर मिला है। उनका कहना है कि सरकारी सहायता मिलने से उन्हें आधुनिक तकनीक अपनाने और कारोबार को आगे बढ़ाने में मदद मिली।
मो० साबिर अपनी सफलता का आधार मेहनत, अनुभव और सरकारी योजनाओं से मिली सहायता को मानते हैं। उनका कहना है कि यदि समय पर आर्थिक सहयोग नहीं मिलता तो आधुनिक मशीनरी स्थापित करना और बड़े स्तर पर उत्पादन करना कठिन होता।
जूसी फर्नीचर की यह यात्रा बताती है कि कौशल, मेहनत और सही अवसर मिलने पर छोटे स्तर से शुरू किया गया व्यवसाय भी आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ सकता है। सरकारी योजनाएं ग्रामीण और स्थानीय उद्यमियों को आर्थिक मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।