नई दिल्ली सम्मेलन में अररिया के पत्रकार को उत्कृष्ट कार्य के लिए राष्ट्रीय सम्मान

अररिया/नई दिल्ली: महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर जिम्मेदार और संवेदनशील पत्रकारिता को मजबूती देने के उद्देश्य से राष्ट्रीय महिला आयोग द्वारा आयोजित दो दिवसीय ‘मीडिया मंथन’ कार्यक्रम 20 और 21 मार्च को नई दिल्ली स्थित सुषमा स्वराज भवन में संपन्न हुआ। इस राष्ट्रीय पत्रकार सम्मेलन में देशभर के प्रिंट और डिजिटल मीडिया से जुड़े पेशेवरों ने भाग लेकर महिला मुद्दों की कवरेज को अधिक प्रभावी, नैतिक और लिंग-संवेदनशील बनाने पर गहन चर्चा की।

कार्यक्रम का उद्घाटन राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने किया, जबकि सदस्य सचिव सुदीप जैन और अतिरिक्त सचिव राधिका चक्रवर्ती भी मौजूद रहीं। पूरे आयोजन की रूपरेखा और संचालन आयोग के मीडिया सलाहकार शिवम गर्ग द्वारा किया गया। सम्मेलन में 20 से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आए पत्रकारों ने अपने अनुभव साझा किए और महिला अधिकारों से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग में आने वाली चुनौतियों और समाधान पर विचार रखा।

सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य महिलाओं के मुद्दों पर गरिमापूर्ण विमर्श को बढ़ावा देना, कानूनी जागरूकता को मजबूत करना और मीडिया की भूमिका को अधिक जिम्मेदार बनाना रहा। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि महिलाओं से जुड़ी खबरों में सनसनीखेज प्रस्तुति के बजाय तथ्यों पर आधारित और संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है, ताकि समाज में सकारात्मक संदेश जाए और पीड़ितों की गरिमा बनी रहे।

कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों को विभिन्न कानूनी प्रावधानों, महिला सुरक्षा से जुड़े कानूनों और रिपोर्टिंग के नैतिक मानकों की जानकारी दी गई। इसके साथ ही डिजिटल मीडिया के बढ़ते प्रभाव और फेक न्यूज की चुनौती पर भी गंभीर चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि मीडिया केवल सूचना देने का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का सशक्त उपकरण है, इसलिए इसकी जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है।

इसी दौरान अररिया जिले से प्रिंट मीडिया के पत्रकार संजय कुमार झा को उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया। यह सम्मान न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि पूरे जिले के मीडिया जगत के लिए गौरव का विषय बन गया है। स्थानीय पत्रकारों और सामाजिक संगठनों ने इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर करते हुए इसे जिले की पहचान को राष्ट्रीय मंच पर स्थापित करने वाला कदम बताया।

सम्मेलन के समापन पर यह संदेश स्पष्ट रूप से सामने आया कि महिला मुद्दों पर सशक्त, संवेदनशील और जिम्मेदार पत्रकारिता ही समाज में वास्तविक बदलाव की दिशा तय कर सकती है।

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