विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान के जरिए प्री-एडोप्शन प्रक्रिया पूरी, प्रशासन ने कहा—अनाथ बच्चों के भविष्य को संवारने की पहल जारी
अररिया: जिले में विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान के माध्यम से चार माह की एक बच्ची को केरल के एक दंपति द्वारा विधिवत गोद लिया गया। जिला प्रशासन की निगरानी में पूरी की गई इस प्रक्रिया के तहत बच्ची को प्री-एडोप्शन फोस्टर केयर में सौंपा गया, जो कानूनी और सामाजिक मानकों के अनुरूप एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इस कार्रवाई को जिला पदाधिकारी के निर्देश पर अंजाम दिया गया, जहां जिला बाल संरक्षण इकाई के सहायक निदेशक द्वारा सभी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद बच्ची को दंपति के सुपुर्द किया गया। इस दौरान बाल संरक्षण से जुड़े तमाम अधिकारी और संस्थान के कर्मचारी मौजूद रहे।
नियमों के तहत पूरी हुई प्रक्रिया
जिला बाल संरक्षण इकाई के अधिकारियों के अनुसार, दत्तक ग्रहण की पूरी प्रक्रिया निर्धारित दिशा-निर्देशों और कानून के तहत की गई। बच्ची को सौंपने से पहले सभी जरूरी कागजी कार्रवाई, जांच और सत्यापन को पूरा किया गया। यह सुनिश्चित किया गया कि दंपति बच्चे के पालन-पोषण और देखभाल के लिए पूरी तरह सक्षम है।
अधिकारियों ने बताया कि यह प्री-एडोप्शन प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसके तहत अंतिम कानूनी गोद लेने से पहले बच्ची को दंपति की देखरेख में दिया जाता है। इससे बच्चे और परिवार के बीच सामंजस्य स्थापित करने का अवसर मिलता है।
पिछले वर्षों में भी हुए सफल दत्तक ग्रहण
प्रशासन ने इस पहल को निरंतर जारी रखने की बात कही है। अधिकारियों ने जानकारी दी कि पिछले वर्ष भी इसी संस्थान के माध्यम से दो बच्चियों को बेंगलुरु के अलग-अलग दंपतियों को गोद दिया गया था। यह दर्शाता है कि जिले में परित्यक्त और अनाथ बच्चों के पुनर्वास के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
जिला प्रशासन का कहना है कि इस तरह की पहल बच्चों को सुरक्षित और स्नेहपूर्ण वातावरण देने में मदद करती है, जिससे उनका भविष्य बेहतर बन सके।
दंपति ने जताई खुशी और संतोष
बच्ची को गोद लेने पहुंचे दंपति ने इस क्षण को अपने जीवन का भावनात्मक और महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। उन्होंने कहा कि यह उनके परिवार के लिए एक नई शुरुआत है और वे बच्ची को बेहतर जीवन देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। दंपति ने संस्थान और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और सहयोगपूर्ण रही।
