नरपतगंज/अररिया। जिले के नरपतगंज नगर पंचायत क्षेत्र में आए तेज आंधी-तूफान और बारिश ने किसानों की महीनों की मेहनत को मिनटों में बर्बाद कर दिया। वार्ड संख्या 3 समेत लगभग सभी वार्डों में खड़ी मकई और गेहूं की फसल पूरी तरह नष्ट हो गई है। इस प्राकृतिक आपदा ने सैकड़ों किसानों को आर्थिक संकट में धकेल दिया है, जिससे क्षेत्र में गहरी मायूसी छा गई है।
तूफान ने उजाड़े खेत, टूटी उम्मीदें
स्थानीय किसान गुड्डू सिंह, रामकुमार सिंह, अनंत नारायण सिंह, हरेराम सादा और दिलीप राम ने बताया कि उन्होंने कर्ज लेकर मकई की खेती की थी। यही फसल उनके परिवार के भरण-पोषण और बच्चों की पढ़ाई का एकमात्र सहारा थी। लेकिन अचानक आए तेज तूफान ने उनकी सारी उम्मीदों को चकनाचूर कर दिया। खेतों में लगी मकई की फसल पूरी तरह टूटकर जमीन पर बिखर गई है। कई जगह गेहूं की बालियां भी झड़ गई हैं, जिससे उत्पादन की पूरी संभावना खत्म हो गई है।
किसानों का कहना है कि उन्होंने मौसम की अनिश्चितता के बावजूद मेहनत कर फसल तैयार की थी, लेकिन इस आपदा ने उन्हें पूरी तरह बर्बाद कर दिया। अब उनके सामने न केवल कर्ज चुकाने की चुनौती है, बल्कि परिवार का पेट भरने का भी संकट खड़ा हो गया है।
हर वार्ड में नुकसान, हजारों किसान प्रभावित
करोड़ गांव के किसान गुड्डू सिंह ने बताया कि उनकी मकई और गेहूं दोनों फसलें पूरी तरह नष्ट हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में ऐसे कई किसान हैं जिनकी पूरी खेती चौपट हो गई है। यह सिर्फ एक गांव की समस्या नहीं, बल्कि पूरे नरपतगंज नगर पंचायत क्षेत्र का हाल है, जहां हर वार्ड में फसल बर्बादी की तस्वीर सामने आ रही है।
अनंत नारायण सिंह ने स्थिति को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि हजारों किसान इस आपदा से प्रभावित हुए हैं। उन्होंने सरकार और प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। किसानों का कहना है कि यदि जल्द राहत नहीं मिली, तो उनका जीवन पूरी तरह संकट में पड़ जाएगा।
मुआवजे की मांग तेज, प्रशासन से सर्वे की अपील
प्रभावित किसानों ने सरकार से मांग की है कि नुकसान का जल्द सर्वे कराया जाए और उचित मुआवजा दिया जाए। किसानों का आरोप है कि हर साल प्राकृतिक आपदाएं आती हैं, लेकिन राहत के नाम पर उन्हें सिर्फ आश्वासन मिलता है।
किसानों ने प्रशासन से अपील की है कि तत्काल टीम भेजकर फसलों के नुकसान का आकलन किया जाए और उन्हें आर्थिक सहायता प्रदान की जाए। फिलहाल नरपतगंज क्षेत्र में मायूसी का माहौल है और किसान अपनी बर्बाद फसलों को देखकर बेहद चिंतित हैं। अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह संकट और गहराने की आशंका है।
