पटना: बिहार विधानमंडल के बजट सत्र का 13वां दिन जबरदस्त हंगामे के बीच बीता। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही कटौती प्रस्ताव को लेकर सत्ता और विपक्ष आमने-सामने आ गए। राजद विधायक सर्वजीत ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जिन सदस्यों ने कटौती प्रस्ताव लाया है, उनके क्षेत्रों में ग्रामीण विकास विभाग के कार्य रोकने की बात कहना बेहद आपत्तिजनक है। उन्होंने ऐसे बयान देने वाले मंत्री के खिलाफ सदन से कार्रवाई की मांग की।
जवाब में मंत्री विजय चौधरी ने सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि सरकार को जनता ने सभी क्षेत्रों में समान रूप से विकास के लिए चुना है और किसी भी क्षेत्र के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि बातचीत के दौरान कही गई किसी बात का गलत अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए। सरकार विकास के मुद्दे पर प्रतिबद्ध है और किसी भी तरह की पक्षपात की राजनीति नहीं करेगी।
दरअसल, बुधवार को मंत्री अशोक चौधरी ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा था कि कटौती प्रस्ताव वापस लिया जाए, अन्यथा हस्ताक्षर करने वाले विधायकों के क्षेत्रों में विभागीय काम प्रभावित हो सकते हैं। इस बयान के बाद विपक्ष ने इसे लोकतांत्रिक भावना के खिलाफ बताया और सदन में तीखी प्रतिक्रिया दी। विपक्षी दलों ने इसे जनप्रतिनिधियों पर दबाव बनाने की कोशिश करार दिया।
सिर्फ कटौती प्रस्ताव ही नहीं, बल्कि अन्य मुद्दों पर भी सदन का माहौल गरम रहा। विधानसभा पोर्टिको में AIMIM विधायक मदरसा शिक्षकों की नियुक्ति की मांग को लेकर प्रदर्शन करते नजर आए। उनका कहना था कि लंबे समय से लंबित नियुक्ति प्रक्रिया को तत्काल पूरा किया जाए।
वहीं, राजद विधायकों ने राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। विपक्ष का आरोप था कि राज्य में अपराध की घटनाएं बढ़ रही हैं और सरकार ठोस कदम उठाने में विफल रही है।
लगातार शोर-शराबे और आरोप-प्रत्यारोप के बीच सदन की कार्यवाही कई बार बाधित हुई। बजट सत्र का यह दिन साफ संकेत दे गया कि आने वाले दिनों में भी सदन में सियासी तापमान ऊंचा रहने वाला है।