पूर्णिया। बढ़ती आबादी, तेज़ी से हो रहे शहरी विस्तार और बढ़ते अपराध दबाव को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने बड़ा प्रशासनिक बदलाव करने की तैयारी शुरू कर दी है। अब जिले में तीन पुलिस अधीक्षक (एसपी) एक साथ काम करेंगे। इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य लंबित मामलों के निष्पादन में तेजी लाना और शहरी-ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर समन्वय स्थापित करना है।
जिले का भौगोलिक विस्तार काफी बड़ा है। एक ओर इसकी सीमा पश्चिम बंगाल से सटी है तो दूसरी ओर कोसी क्षेत्र के जिलों से जुड़ाव है। ऐसे में अपराध नियंत्रण और त्वरित कार्रवाई के लिए अलग-अलग ज़िम्मेदारी तय करना प्रशासनिक रूप से आवश्यक माना जा रहा है।
आईजी विवेकानंद ने पुलिस मुख्यालय को सिटी एसपी पद सृजन का प्रस्ताव भेजा है। प्रस्ताव के अनुसार जिले में तीन स्तर पर कार्य विभाजन होगा—नगर पुलिस अधीक्षक, ग्रामीण एसपी और सिटी एसपी।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत नगर पुलिस अधीक्षक के अधीन के हाट, मधुबनी, सहायक खजांची, मरंगा, सदर थाना, मुफस्सिल, के नगर, कसबा, श्रीनगर, चंपानगर और जलालगढ़ थाना क्षेत्र शामिल होंगे। शहरी इलाकों में विशेष रूप से ट्रैफिक व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, गश्ती व्यवस्था और अनुसंधान को सुदृढ़ करने पर जोर रहेगा।
वहीं ग्रामीण एसपी के अधीन बायसी, बनमनखी और धमदाहा अनुमंडल के 16 थाने—भवानीपुर, रघुवंश नगर, बलिया, मोहनपुर, अकबरपुर, रुपौली, धमदाहा, मीरगंज, बी कोठी, रौटा, अमौर, बायसी, डगरूआ, सरसी और जानकी नगर—की जिम्मेदारी होगी। ग्रामीण क्षेत्रों में लंबित मामलों की समीक्षा और सीमावर्ती इलाकों में सतर्कता बढ़ाने की रणनीति बनाई जा रही है।
शहरी क्षेत्र का समग्र भार फिलहाल पुलिस अधीक्षक के पास रहेगा, जबकि नई व्यवस्था लागू होने के बाद कार्यों का स्पष्ट बंटवारा किया जाएगा। प्रशासन का मानना है कि इस मॉडल से न केवल अपराध नियंत्रण में मजबूती आएगी, बल्कि आम जनता को त्वरित न्याय और बेहतर पुलिसिंग का लाभ भी मिलेगा।