दहेज की मांग ने ली एक और जान, 8 माह पहले हुई थी शादी

अररिया: जिले के रानीगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत गिदवास वार्ड संख्या 9 में दहेज को लेकर 19 वर्षीय नवविवाहिता अंजनी कुमारी की गला दबाकर हत्या किए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। मृतका के पिता कुलानंद मंडल ने दामाद सुरेंद्र मंडल और उसके परिजनों पर दो कट्ठा जमीन दहेज में नहीं देने के कारण हत्या करने का गंभीर आरोप लगाया है। घटना के बाद पूरे इलाके में आक्रोश व्याप्त है।

परिजनों के अनुसार, अंजनी की शादी आठ माह पूर्व हिंदू रीति-रिवाज से गिदवास निवासी उद्यानंद मंडल के पुत्र सुरेंद्र मंडल के साथ हुई थी। विदाई के समय पिता द्वारा नगद 3 लाख रुपये, एक बाइक, आठ आना सोने की अंगूठी और फर्नीचर का सामान दिया गया था। इसके बावजूद ससुराल पक्ष की मांगें खत्म नहीं हुईं।

आरोप है कि शादी के कुछ ही दिनों बाद अंजनी पर दबाव बनाया जाने लगा कि उसके पिता सड़क किनारे स्थित दो कट्ठा जमीन ससुराल पक्ष के नाम रजिस्ट्री करा दें। अंजनी द्वारा इसका विरोध करने पर उसे लगातार शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना दी जाती रही। पति और परिवार के अन्य सदस्यों द्वारा मारपीट की घटनाएं बढ़ती गईं।

16 फरवरी की देर रात करीब 11 बजे कुलानंद मंडल को एक अज्ञात नंबर से फोन कर सूचना दी गई कि उनकी बेटी की हत्या कर दी गई है। सूचना मिलते ही वे ग्रामीणों के साथ रात लगभग 11:40 बजे ससुराल पहुंचे, जहां अंजनी का शव घर में पड़ा मिला। घर के सभी सदस्य मौके से फरार बताए जा रहे हैं।

घटना की जानकारी मिलते ही रानीगंज थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है। पुलिस फरार आरोपियों की तलाश में छापेमारी कर रही है।

इस घटना ने एक बार फिर दहेज प्रथा की भयावह सच्चाई को उजागर कर दिया है। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने इस जघन्य अपराध की कड़ी निंदा करते हुए दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी और कड़ी सजा की मांग की है।

थाना अध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। परिजनों के आवेदन के आधार पर प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया चल रही है। दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

गांव में मातम का माहौल है। आठ महीने पहले जिस घर में खुशियों के साथ बेटी की विदाई हुई थी, आज वहीं सन्नाटा पसरा है। यह घटना समाज के सामने फिर एक बड़ा सवाल खड़ा करती है कि आखिर कब तक बेटियां दहेज की बलि चढ़ती रहेंगी?

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