आठ माह से मानदेय लंबित, आवास सहायकों का कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन
अररिया: सरकार की महत्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) को धरातल पर उतारने वाले आवास सहायक इन दिनों अपने ही अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। आठ माह से मानदेय भुगतान लंबित रहने और मानदेय पुनरीक्षण की मांग को लेकर राज्य ग्रामीण आवास कर्मी संघ के बैनर तले दूसरे दिन भी कलेक्ट्रेट परिसर में धरना जारी रहा।
संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि संघ के निर्देश पर हड़ताल को दो दिन और बढ़ाकर 20 फरवरी तक जारी रखने का निर्णय लिया गया है। इसकी लिखित सूचना उप विकास आयुक्त को सौंप दी गई है।
जिलाध्यक्ष जितेन्द्र कुमार ने कहा कि जिले में करीब 140 ग्रामीण आवास कर्मी कार्यरत हैं, जिनमें आवास सहायक, सुपरवाइजर और लेखा सहायक शामिल हैं। ये कर्मी लाभुकों के चयन, सूची निर्माण और आवास निर्माण की निगरानी जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाते हैं। बावजूद इसके पिछले आठ माह से मानदेय नहीं मिलना चिंताजनक है।
धरना पर बैठे कर्मियों ने कहा कि पांच सदस्यीय कमेटी द्वारा मानदेय वृद्धि को लेकर दी गई रिपोर्ट को अब तक लागू नहीं किया गया है। पांच वर्षों से मानदेय पुनरीक्षण नहीं होने से नाराजगी बढ़ती जा रही है। कर्मियों की मांग है कि उन्हें राज्यकर्मी का दर्जा दिया जाए और स्थायी नौकरी सुनिश्चित की जाए।
आवास सहायकों का कहना है कि वर्तमान अल्प मानदेय में परिवार का भरण-पोषण, बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना कठिन हो गया है। कार्यालय और कार्यक्षेत्र तक आने-जाने के लिए ईंधन खर्च भी स्वयं वहन करना पड़ता है। आर्थिक तंगी के कारण कई कर्मी मानसिक तनाव और बीमारियों से जूझ रहे हैं।
धरना में शामिल संगीता कुमारी ने कहा कि मानदेय वृद्धि और लंबित भुगतान ही उनकी प्रमुख मांग है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो कर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को बाध्य होंगे।
जितेन्द्र कुमार यादव, जिला अध्यक्ष, बिहार राज्य कर्मचारी महासंघ ने कहा कि दो सितंबर 2025 को राज्य मंत्री परिषद की बैठक में समय पर मानदेय भुगतान की स्वीकृति मिली थी, लेकिन विभागीय उदासीनता के कारण भुगतान अब तक लंबित है। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार उपेक्षा के कारण कर्मी भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं।
धरना स्थल पर रूबी कुमारी, सुनील कुमार, अहमद मुख्तार गाजी सहित सैकड़ों आवास सहायक मौजूद रहे। कर्मियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने शीघ्र सकारात्मक पहल नहीं की तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।