पटना: बिहार विधानसभा चुनाव से पहले केंद्र सरकार की बड़ी घोषणा अब जमीन पर उतरती दिख रही है। राज्य में 19 नए केंद्रीय विद्यालय खोलने के लिए 2135.85 करोड़ रुपये की मंजूरी दे दी गई है। इस फैसले से करीब 30 हजार छात्र-छात्राओं को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि इन विद्यालयों में पहली बार बालवाटिका (प्री-प्राइमरी) से ही पढ़ाई शुरू की जाएगी। यानी छोटे बच्चों को भी केंद्रीय विद्यालय की आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अवसर मिलेगा।
इन नए विद्यालयों में मधुबनी जिले को दो केंद्रीय विद्यालयों की सौगात मिली है। इसके अलावा गया, पटना, मुजफ्फरपुर, पूर्णिया, अरवल, कैमूर, मधेपुरा, शेखपुरा, भोजपुर, भागलपुर, नालंदा, मुंगेर और दरभंगा जिलों में जमीन चिन्हित कर ली गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में कम से कम 5 एकड़ और शहरी इलाकों में ढाई से 4 एकड़ जमीन तय कर रिपोर्ट सरकार को भेजी गई है।
यह जमीन केंद्रीय विद्यालय संगठन को मुफ्त उपलब्ध कराई जाएगी। भवन निर्माण, क्लासरूम, खेल मैदान और अन्य आधारभूत सुविधाओं के लिए राशि केंद्र सरकार देगी। स्थायी भवन बनने तक कक्षाएं अस्थायी तौर पर सरकारी भवनों में संचालित होंगी। जिलाधिकारियों को बिजली, पानी और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।
वर्तमान में देशभर में 1288 केंद्रीय विद्यालय संचालित हैं, जहां 14 लाख से अधिक छात्र अध्ययनरत हैं। बिहार में अभी 16 केंद्रीय विद्यालय हैं, लेकिन 19 नए विद्यालय खुलने के बाद यह संख्या बढ़कर 35 हो जाएगी।
हर नए केंद्रीय विद्यालय में कुल 1520 सीटें निर्धारित की गई हैं। कक्षा 1 में प्रत्येक सेक्शन में 40 छात्रों का नामांकन होगा, जिसमें 25 प्रतिशत सीटें RTE कानून के तहत आरक्षित रहेंगी। कक्षा 11 में विज्ञान, कला और वाणिज्य तीनों संकायों को मिलाकर 120 सीटें तय की गई हैं।
शिक्षा क्षेत्र में यह कदम राज्य के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब देखना होगा कि निर्माण कार्य कितनी तेजी से पूरा होता है और छात्रों को इसका लाभ कब तक मिल पाता है।
