सीमांचल सहित पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों को जोड़कर प्रस्तावित केंद्र शासित प्रदेश की संभावित राजधानी को लेकर राजनीतिक और सामाजिक चर्चा तेज हो गई है। इस बीच अखिल भारतीय वैश्य महासम्मेलन के प्रदेश महामंत्री (संगठन) प्रभारी पूर्णिया, कोशी एवं भागलपुर प्रमंडल अनिल कुमार साहा ने केंद्र सरकार से प्रस्तावित राजधानी पूर्णिया में स्थापित करने की मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि यदि पूर्णिया की उपेक्षा की गई तो सीमांचल क्षेत्र में जन आक्रोश बढ़ सकता है।
पूर्णिया: सीमांचल क्षेत्र सहित पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों को जोड़कर प्रस्तावित केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने की चर्चाओं के बीच राजधानी के चयन को लेकर बहस तेज हो गई है। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों और अन्य स्रोतों में चल रही चर्चाओं के आधार पर राजधानी को पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में स्थापित किए जाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा या पुष्टि नहीं हुई है।
इसी विषय पर अखिल भारतीय वैश्य महासम्मेलन के प्रदेश महामंत्री (संगठन) प्रभारी पूर्णिया, कोशी एवं भागलपुर प्रमंडल अनिल कुमार साहा ने केंद्र सरकार से प्रस्तावित राजधानी के संबंध में स्पष्टता लाने और पूर्णिया को प्राथमिकता देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सीमांचल क्षेत्र के भौगोलिक, ऐतिहासिक और प्रशासनिक महत्व को देखते हुए पूर्णिया राजधानी के लिए उपयुक्त स्थान हो सकता है।
ऐतिहासिक और भौगोलिक आधार पर उठी मांग
अनिल कुमार साहा ने अपने बयान में कहा कि ऐतिहासिक दृष्टिकोण से पूर्णिया का विशेष महत्व रहा है। उन्होंने दावा किया कि अंग्रेजी शासन काल और वर्ष 1912 के आसपास बिहार, बंगाल और उड़ीसा एक संयुक्त प्रशासनिक इकाई के रूप में कार्य करते थे, जिसकी राजधानी कोलकाता थी। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान दार्जिलिंग क्षेत्र कभी पूर्णिया जिले के प्रशासनिक दायरे में शामिल रहा था।
साहा के अनुसार, पूर्णिया एक पुराना और ऐतिहासिक जिला है, जिसकी प्रशासनिक पहचान लंबे समय से रही है। उनका कहना है कि यदि सीमांचल और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों को जोड़कर किसी नए केंद्र शासित प्रदेश का गठन किया जाता है, तो राजधानी के लिए पूर्णिया एक व्यवहारिक विकल्प हो सकता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि लंबे समय से पूर्णिया और सीमांचल क्षेत्र की उपेक्षा की जाती रही है।
राजधानी चयन को लेकर राजनीतिक संदेश
अनिल कुमार साहा ने कहा कि यदि प्रस्तावित केंद्र शासित प्रदेश की राजधानी पूर्णिया के बजाय किसी अन्य शहर को बनाया जाता है, तो सीमांचल क्षेत्र की जनता इसे उपेक्षा के रूप में देख सकती है। उन्होंने आशंका जताई कि इससे जन असंतोष बढ़ सकता है और इसका राजनीतिक प्रभाव भविष्य में चुनावी समीकरणों पर भी पड़ सकता है।
हालांकि, अब तक केंद्र सरकार या संबंधित एजेंसियों की ओर से सीमांचल और पश्चिम बंगाल के हिस्सों को जोड़कर किसी केंद्र शासित प्रदेश के गठन अथवा राजधानी निर्धारण को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में यह मामला फिलहाल चर्चाओं और जनप्रतिनिधियों की प्रतिक्रियाओं तक सीमित है।
अनिल कुमार साहा ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि यदि भविष्य में इस प्रकार का कोई प्रस्ताव आता है, तो सीमांचल क्षेत्र और पूर्णिया प्रमंडल के हितों को ध्यान में रखते हुए पूर्णिया को प्रस्तावित राजधानी के रूप में प्राथमिकता दी जाए।