जनता दरबार में फूटा जनआक्रोश, 23 मामलों पर डीएम ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश

अररिया। समाहरणालय स्थित आत्मन सभागार में आयोजित जनता दरबार में मंगलवार को आम लोगों की समस्याओं का सैलाब उमड़ पड़ा। सात निश्चय 3.0 के तहत “सबका सम्मान–जीवन आसान” कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित इस दरबार में कुल 23 मामलों की सुनवाई हुई, जहां जिला पदाधिकारी विनोद दूहन ने स्पष्ट शब्दों में अधिकारियों को लापरवाही छोड़ त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए।

जमीन विवाद और कब्जे के मामलों पर प्रशासन सख्त
जनता दरबार में सबसे ज्यादा मामले जमीन विवाद और अवैध कब्जे से जुड़े सामने आए। हीरामणि देवी ने एग्रीमेंट के आधार पर मिली जमीन पर घर बनाने से रोके जाने की शिकायत रखी, तो मोहम्मद अबरार ने अपनी जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराने की गुहार लगाई। वहीं, गणेश लाल ठाकुर ने जमाबंदी में हेराफेरी का गंभीर आरोप लगाया। इन मामलों को सुनते ही डीएम ने संबंधित अधिकारियों को तत्काल जांच कर रिपोर्ट सौंपने और दोषियों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

भुगतान लंबित और फसल नुकसान से बढ़ी नाराजगी
जगत पासवान सहित कई लोगों ने एसीपी और एमएएसीपी भुगतान लंबित होने का मुद्दा उठाया, जिससे कर्मचारियों में नाराजगी साफ दिखी। दूसरी ओर, हाल की आंधी-तूफान से फसल बर्बादी को लेकर सुरेंद्र मिश्रा ने गेहूं और मक्का की क्षति का मामला उठाते हुए मुआवजे की मांग की। इस पर डीएम ने आपदा प्रबंधन और कृषि विभाग को संयुक्त रूप से जांच कर शीघ्र राहत देने का निर्देश दिया।

डीएम ने साफ कहा कि जनता दरबार सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि आम जनता की समस्याओं का त्वरित और पारदर्शी समाधान सुनिश्चित करने का मंच है। उन्होंने चेतावनी दी कि शिकायतों के निपटारे में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

इस दौरान विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे, जिन्हें मौके पर ही मामलों के निष्पादन के लिए जिम्मेदारी सौंपी गई। जनता दरबार में पहुंचे लोगों ने उम्मीद जताई कि इस बार उनकी समस्याओं का समाधान कागजों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जमीन पर भी दिखेगा।

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