-
जन जागरण शक्ति संगठन से जुड़े सैकड़ों मजदूर सड़कों पर उतरे, मनरेगा बहाली और चार लेबर कोड रद्द करने की उठाई मांग
अररिया।
मजदूर विरोधी एवं कॉरपोरेट परस्त नीतियों के खिलाफ केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और विभिन्न मजदूर संगठनों के आह्वान पर गुरुवार को आयोजित देशव्यापी आम हड़ताल का असर अररिया में भी देखने को मिला। इस हड़ताल के समर्थन में जन जागरण शक्ति संगठन से जुड़े सैकड़ों मजदूरों ने शहर में प्रदर्शन कर केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
प्रदर्शनकारियों ने शहर के विभिन्न मार्गों से जुलूस निकालते हुए अपनी मांगों को प्रमुखता से रखा। मजदूरों का कहना था कि सरकार की नीतियों के कारण श्रमिक वर्ग की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। उन्होंने मनरेगा योजना को पुनः बहाल करने, चारों नए लेबर कोड को रद्द करने, कॉरपोरेट हितों को बढ़ावा देने वाली नीतियों को वापस लेने तथा अमेरिका के साथ सम्मानजनक व्यापार समझौता करने की मांग उठाई, जिसमें किसानों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित हो।
संगठन की संचालन समिति के सदस्य मायानंद ऋषिदेव ने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियों का सीधा असर मजदूरों और गरीब तबके पर पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मनरेगा योजना महिला मजदूरों के लिए सबसे बड़ा सहारा थी, जिसे बंद कर दिए जाने से ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने सरकार से तत्काल मनरेगा को पुनः लागू करने की मांग की।
वहीं रंजीत पासवान ने कहा कि किसानों को आर्थिक सहायता तो दी जा रही है, लेकिन उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों को मजबूरन खेती छोड़कर मजदूरी के लिए बड़े शहरों की ओर पलायन करना पड़ रहा है, जिससे फैक्ट्री मालिकों को सस्ते श्रमिक उपलब्ध हो रहे हैं। यह स्थिति ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
प्रदर्शन के दौरान मजदूरों ने एकजुटता का प्रदर्शन करते हुए अपनी मांगों को लेकर संघर्ष जारी रखने की बात कही। संगठन के नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
आज के प्रदर्शन को सफल बनाने में रंजीत पासवान, सुनील, पवन कुमार राम, सत्यभामा और रंजय पासवान की अहम भूमिका रही।