धान-गेहूं खरीद, डिजिटल पोर्टल संचालन और सहकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर दिया गया मार्गदर्शन
अररिया। जिले में सहकारिता व्यवस्था को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से सोमवार को अररिया टाउन हॉल में सहकारिता विभाग द्वारा पैक्स अध्यक्ष, प्रबंधक और व्यापार मंडल अध्यक्षों के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पूर्णिया प्रमंडल के संयुक्त निबंधक सहयोग समितियां अजमत हयात मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे।
कार्यक्रम में जिला सहकारिता पदाधिकारी मधुसूदन आनंद, जिला अंकेक्षण पदाधिकारी स्तुति कुमारी, सीएससी जिला प्रबंधक रविन्द्र कुमार तथा नाबार्ड के डीडीएम मयंक कुमार मंचासीन रहे। प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिले के विभिन्न प्रखंडों से आए सैकड़ों पैक्स अध्यक्ष, प्रबंधक और व्यापार मंडल अध्यक्षों ने भाग लेकर सहकारिता से जुड़ी नई व्यवस्थाओं और प्रक्रियाओं की जानकारी प्राप्त की।
इस दौरान फारबिसगंज प्रखंड के मटियारी पैक्स अध्यक्ष दिलीप कुमार सिंह सहित बड़ी संख्या में प्रतिनिधियों ने प्रशिक्षण में सक्रिय भागीदारी की।
सहकारिता व्यवस्था की भूमिका पर जोर
प्रशिक्षण कार्यशाला में अधिकारियों ने बताया कि पैक्स (प्राथमिक कृषि ऋण समिति) ग्रामीण अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी है। पैक्स के माध्यम से किसानों को धान और गेहूं की सरकारी दर पर खरीद, कृषि ऋण, खाद-बीज वितरण तथा सरकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराया जाता है।
अधिकारियों ने पैक्स अध्यक्षों और प्रबंधकों को उनकी प्रशासनिक जिम्मेदारियों, रिकॉर्ड प्रबंधन और पारदर्शी कार्यप्रणाली के बारे में विस्तार से जानकारी दी। यह भी बताया गया कि यदि पैक्स प्रणाली सही तरीके से संचालित हो तो किसानों को सीधे लाभ मिल सकता है और कृषि व्यवस्था मजबूत हो सकती है।
डिजिटल पोर्टल और ऑनलाइन प्रबंधन की जानकारी
कार्यशाला में ई-सहकारिता और पैक्स पोर्टल के माध्यम से काम करने की प्रक्रिया पर भी विशेष प्रशिक्षण दिया गया। इसमें किसानों का ऑनलाइन पंजीकरण, धान-गेहूं खरीद की डिजिटल एंट्री, डेटा अपलोड, रिपोर्टिंग और रिकॉर्ड प्रबंधन की तकनीक समझाई गई।
सीएससी और तकनीकी विशेषज्ञों ने बताया कि डिजिटल व्यवस्था लागू होने से पारदर्शिता बढ़ेगी, भ्रष्टाचार की संभावना कम होगी और विभागीय निगरानी भी आसान होगी। साथ ही पैक्स प्रतिनिधियों को पोर्टल पर नियमित डेटा अपडेट करने की जिम्मेदारी निभाने पर जोर दिया गया।
किसानों को सीधे लाभ पहुंचाने पर जोर
प्रशिक्षण के दौरान यह भी बताया गया कि पैक्स के माध्यम से किसानों को समय पर खाद, बीज और कृषि सामग्री उपलब्ध कराना, कृषि ऋण दिलाने में सहयोग करना, तथा सरकारी योजनाओं की जानकारी देना उनकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
इसके अलावा भंडारण और गोदाम प्रबंधन, अनाज के सुरक्षित रख-रखाव की तकनीक और गोदाम संचालन के नियमों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने पैक्स प्रतिनिधियों से अपील की कि वे अपने क्षेत्र के किसानों की समस्याओं को विभाग तक पहुंचाएं और सहकारिता से जुड़े नए व्यापारिक अवसरों को भी बढ़ावा दें।
कार्यक्रम के अंत में अधिकारियों ने कहा कि सहकारिता व्यवस्था को मजबूत बनाने में पैक्स प्रतिनिधियों की सक्रिय भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। यदि प्रशिक्षण में दी गई जानकारी का सही तरीके से पालन किया जाए तो इससे किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने में मदद मिलेगी।
