रमजान के आखिरी जुम्मा से पहले अररिया शहर गंदगी के ढेर में तब्दील हो गया है। आउटसोर्सिंग कंपनी को सफाई का जिम्मा सौंपने के विरोध में सफाई कर्मियों की हड़ताल और नगर परिषद अधिकारियों के बीच जारी खींचतान ने आम जनजीवन को नारकीय बना दिया है।
अररिया। नगर परिषद क्षेत्र की सूरत इन दिनों बदहाल है। शहर के मुख्य चौक-चौराहों से लेकर गलियों तक में कचरे का अंबार लगा हुआ है। भीषण गर्मी और ऊपर से सड़कों पर बिखरी गंदगी से उठती सड़ांध ने राहगीरों और स्थानीय निवासियों का जीना मुहाल कर दिया है। सबसे गंभीर स्थिति रमजान के पवित्र महीने में देखने को मिल रही है। कल यानी शुक्रवार को रमजान का आखिरी जुम्मा (अलविदा जुम्मा) है, लेकिन इबादतगाहों की ओर जाने वाले रास्ते गंदगी से पटे पड़े हैं।
आउटसोर्सिंग के विरोध में हड़ताल पर सफाई कर्मी
सफाई व्यवस्था ठप होने का मुख्य कारण नगर परिषद द्वारा सफाई कार्य को किसी निजी आउटसोर्सिंग कंपनी को सौंपने का प्रस्ताव है। इस निर्णय के खिलाफ बड़ी संख्या में सफाई कर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। सफाई कर्मियों का तर्क है कि आउटसोर्सिंग से उनकी नौकरी पर खतरा मंडराएगा और शोषण बढ़ेगा। वहीं, नगर परिषद प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच इस मुद्दे पर तालमेल की भारी कमी दिख रही है। परिषद के भीतर मचे घमासान और एक-दूसरे पर दोषारोपण के कारण समाधान का कोई रास्ता निकलता नहीं दिख रहा।
त्योहार के समय बढ़ी मुश्किलें
नगरवासियों ने बताया की चांदनी चौक, जामा मस्जिद रोड, बस स्टैंड और काली मंदिर मार्ग जैसे व्यस्त इलाकों में कचरा न उठने से व्यापारी और श्रद्धालु दोनों परेशान हैं। जामा मस्जिद के पास जमा गंदगी ने नमाजियों की चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि रमजान के अंतिम दौर में जहां शहर को साफ-सुथरा होना चाहिए था, वहां नगर परिषद की आंतरिक राजनीति ने जनता को लाचार छोड़ दिया है।
प्रशासनिक विफलता और जन आक्रोश
नगर परिषद के अधिकारियों और पार्षदों के बीच जारी आरोप-प्रत्यारोप ने स्थिति को और पेचीदा बना दिया है। एक तरफ अधिकारी बजट और कार्यकुशलता का हवाला दे रहे हैं, तो दूसरी तरफ पार्षदों का एक गुट इस पूरी प्रक्रिया को जनविरोधी बता रहा है। इस खींचतान के बीच नालियां जाम हैं और सड़कों पर फैला कचरा संक्रामक बीमारियों को दावत दे रहा है।
मुख्य बिंदु:
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हड़ताल का असर: सफाई कर्मियों के काम बंद करने से शहर के सभी वार्डों में कचरा जमा।
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अंतिम जुम्मा: शुक्रवार की नमाज से पहले सड़कों की सफाई न होना प्रशासन की बड़ी विफलता।
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संक्रामक बीमारियों का डर: कचरे की सड़ांध से मच्छरों का प्रकोप और बीमारियों का खतरा बढ़ा।
जनता ने चेतावनी दी है कि यदि अलविदा जुम्मा और ईद से पहले सफाई व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।
