अररिया मॉडल पर पूरे बिहार में ‘चिकित्सा आपके द्वार’ अभियान
अररिया जिले में अप्रैल 2026 से संचालित ‘जाँच एवं उपचार–चिकित्सा आपके द्वार’ कार्यक्रम को अब पूरे बिहार में राज्यव्यापी अभियान के रूप में लागू किया गया है। बुधवार को राज्य स्तर पर अभियान का शुभारंभ किया गया। 02 सितंबर से 30 नवंबर 2026 तक चलने वाले इस अभियान के तहत स्वास्थ्य टीमें घर-घर पहुंचकर लोगों की स्क्रीनिंग, जांच, स्वास्थ्य परामर्श, उपचार और आवश्यक फॉलो-अप की सुविधा उपलब्ध कराएंगी। 
अररिया, 02 सितंबर 2026। स्वास्थ्य सेवाओं को लोगों के घर तक पहुंचाने की दिशा में अररिया जिले में पहले से संचालित ‘जाँच एवं उपचार–चिकित्सा आपके द्वार’ कार्यक्रम अब पूरे बिहार के लिए एक राज्यव्यापी अभियान का आधार बन गया है। राज्य स्तर पर बुधवार को इस विशेष अभियान का शुभारंभ किया गया। इसके साथ ही बिहार के सभी जिलों में घर-घर पहुंचकर लोगों की स्वास्थ्य जांच और उपचार की व्यवस्था शुरू की जाएगी।
यह अभियान 02 सितंबर से 30 नवंबर 2026 तक तीन महीने की अवधि में संचालित होगा। अभियान का उद्देश्य गैर-संचारी रोगों की समय पर पहचान करना, मरीजों को आवश्यक उपचार उपलब्ध कराना तथा लोगों को गंभीर बीमारियों से बचाव के प्रति जागरूक करना है।
अभियान के तहत स्वास्थ्य टीमें मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मुंह का कैंसर, स्तन कैंसर, गर्भाशय ग्रीवा कैंसर, हृदय रोग, नॉन-अल्कोहलिक फैटी लीवर डिजीज और क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज सहित विभिन्न बीमारियों की स्क्रीनिंग और आवश्यक जांच करेंगी। जांच के दौरान बीमारी या उसके लक्षण पाए जाने पर मरीजों को आगे की चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के साथ फॉलो-अप की व्यवस्था भी की जाएगी।
राज्यव्यापी अभियान के शुभारंभ के अवसर पर अररिया के परमान सभागार में जिला स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जिला प्रशासन, जिला परिषद और स्वास्थ्य विभाग के प्रतिनिधियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्य स्तरीय कार्यक्रम में भाग लिया।
जिला पदाधिकारी विनोद दूहन ने बताया कि ‘जाँच एवं उपचार–चिकित्सा आपके द्वार’ की अवधारणा मार्च 2026 में तैयार की गई थी और अप्रैल 2026 से अररिया जिले में इसे धरातल पर लागू किया गया। कार्यक्रम के तहत जिले की पंचायतों, गांवों और घरों तक स्वास्थ्य टीमें पहुंचीं तथा लोगों की विभिन्न बीमारियों की स्क्रीनिंग और जांच की गई।
उन्होंने बताया कि अभियान को लोगों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने के बाद स्वास्थ्य जांच के दायरे का विस्तार किया गया और मोतियाबिंद की जांच एवं उपचार को भी इसमें शामिल किया गया। अररिया जिले में अब तक 8 लाख 41 हजार 54 लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है। इनमें उच्च रक्तचाप के 7,834 मरीजों की दवा शुरू की गई है, जबकि मधुमेह के 6,363 मरीजों का उपचार शुरू हो चुका है।
स्क्रीनिंग के दौरान मुंह के कैंसर के 9,143 संदिग्ध मामले सामने आए हैं, जिनकी बायोप्सी और आगे की जांच की रिपोर्ट मिलनी बाकी है। इसके अलावा स्तन कैंसर के 1,206 और गर्भाशय ग्रीवा कैंसर के 120 संदिग्ध मामले चिह्नित किए गए हैं। एनीमिया के 1,042 मामलों की पहचान कर उपचार के लिए दवाएं शुरू की गई हैं।
जिले में मोतियाबिंद के 610 मामले भी सामने आए, जिनमें 500 से अधिक मरीजों का ऑपरेशन कराया जा चुका है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अभियान का मुख्य उद्देश्य केवल बीमारी की पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि संदिग्ध मरीजों को उपचार की पूरी प्रक्रिया से जोड़ना भी है।
अभियान के तहत प्रशिक्षित एएनएम घर-घर जाकर 30 वर्ष और उससे अधिक आयु के नागरिकों की डिजिटल बीपी मशीन और ब्लड शुगर किट से जांच करती हैं। जांच में बीमारी के लक्षण या आशंका मिलने पर संदिग्ध मरीजों की लाइन-लिस्टिंग की जाती है। इसके बाद चिकित्सा अधिकारियों द्वारा पुष्टि होने पर दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं और आवश्यकता पड़ने पर मरीजों को उच्च चिकित्सा संस्थानों में रेफर किया जाता है।
अररिया में शुरू हुआ यह मॉडल अब पूरे बिहार में लागू होने जा रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं की घर तक पहुंच, बीमारियों की शुरुआती पहचान और समय पर उपचार की व्यवस्था को इस अभियान की प्रमुख विशेषता माना जा रहा है।
अररिया से राजीव रंजन की रिपोर्ट।
