7.32 करोड़ का झमटा-महिशाकोल पुल 3 साल में ही धंसा

7.32 करोड़ की लागत से बना झमटा-महिशाकोल पुल महज 3 साल में जर्जर होने लगा है। पाया धंस रहा है, रेलिंग फट रही है, स्थानीय लोग बड़े हादसे की आशंका जता रहे हैं।

अररिया प्रखंड अंतर्गत परमान नदी पर बना झमटा-महिशाकोल पुल अब गंभीर खतरे का संकेत दे रहा है। लगभग 7.32 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 206.72 मीटर लंबे इस पुल का निर्माण मई 2022 में पूरा हुआ था, लेकिन महज तीन वर्षों के भीतर ही इसकी स्थिति चिंताजनक हो गई है। पुल का पाया धंसता पाया गया है, जबकि रेलिंग में कई स्थानों पर दरारें दिखाई दे रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल की वर्तमान स्थिति किसी बड़े हादसे की आशंका को जन्म दे रही है।

हालांकि पुल पर अभी आवागमन जारी है, लेकिन इसकी जर्जर होती संरचना को लेकर लोगों में डर का माहौल है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता का अभाव रहा, जिसका परिणाम अब सामने दिखाई दे रहा है। बताया जाता है कि पुल निर्माण के दौरान भी गुणवत्ता को लेकर कई बार सवाल उठे थे और कुछ ग्रामीणों ने काम रुकवाने तक की कोशिश की थी। बावजूद इसके कार्य जारी रखा गया।

शिकायतों के बाद डीएम से जांच की मांग

इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला पार्षद सबा फैसल ने जिलाधिकारी, अररिया को आवेदन देकर पुल की तत्काल उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। वहीं गैर सरकारी संगठन “अररिया का मुद्दा” के फाउंडर फैसल जावेद यासीन ने भी जिलाधिकारी से मिलकर पूरे मामले की जानकारी दी। उन्होंने दावा किया कि निर्माण कार्य के दौरान कई बार संवेदक और इंजीनियर को गुणवत्ता संबंधी शिकायतें दी गई थीं, लेकिन इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

फैसल जावेद यासीन ने बताया कि विभागीय एसडीओ से बातचीत हुई है, जिसमें संवेदक से पुल की मरम्मत कराने की बात कही गई है। स्थानीय लोगों के अनुसार पुल का निर्माण प्रकाश कंस्ट्रक्शन द्वारा कराया गया था। अब बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि करोड़ों रुपये की लागत से बना पुल इतनी जल्दी जर्जर कैसे हो गया और शिकायतों के बावजूद संबंधित विभाग ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की।

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