अररिया में 2026 की पहली राष्ट्रीय लोक अदालत, हजारों मामलों के निपटारे की पहल

जिला व्यवहार न्यायालय परिसर में 16 बेंचों का गठन, करीब 3450 मामलों के आपसी समझौते से निपटारे का लक्ष्य

अररिया। जिला व्यवहार न्यायालय परिसर में शनिवार को वर्ष 2026 की पहली राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत जिला एवं प्रधान सत्र न्यायाधीश गुंजन पांडे ने पक्षकारों के साथ संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर की। इस मौके पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव रोहित श्रीवास्तव, सीजेएम अमरेंद्र प्रसाद, न्यायाधीश ,  डीसी रोजी कुमारी, यातायात पुलिस उपाध्यक्ष फकड़े आलम सहित कई न्यायिक पदाधिकारी और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। इस लोक अदालत का उद्देश्य लंबित सुलहनीय मामलों का त्वरित, सुलभ और निःशुल्क निपटारा करना है, ताकि आम लोगों को अदालतों की लंबी और खर्चीली प्रक्रिया से राहत मिल सके।

इस आयोजन का संचालन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अररिया द्वारा किया गया, जो राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली और बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, पटना के निर्देश पर आयोजित हुआ। लोक अदालत में कुल 16 बेंचों का गठन किया गया, जहां विभिन्न प्रकार के मामलों की सुनवाई की गई। इनमें मोटर दुर्घटना दावा, बैंक ऋण विवाद, चेक बाउंस, पारिवारिक विवाद, बिजली बिल, श्रम विवाद, सिविल मामले और आपसी समझौते वाले आपराधिक मामले शामिल रहे। जानकारी के अनुसार इस लोक अदालत में करीब 3450 मामलों के निपटारे का लक्ष्य रखा गया है।

कार्यक्रम के दौरान न्यायिक अधिकारियों ने कहा कि लोक अदालत न्याय व्यवस्था को सरल और प्रभावी बनाने का एक मजबूत माध्यम है। जिला एवं प्रधान सत्र न्यायाधीश गुंजन पांडे ने कहा कि लोक अदालत की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां “केवल जीत ही जीत होती है, हार नहीं”। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे इस मंच का अधिक से अधिक उपयोग करें, क्योंकि यहां बिना लंबी कानूनी प्रक्रिया और कम खर्च में विवादों का समाधान संभव है। अधिकारियों ने यह भी बताया कि लोक अदालत में होने वाला फैसला अंतिम और बाध्यकारी होता है।

लोक अदालत के सफल आयोजन को लेकर पहले से जागरूकता अभियान चलाया गया था। ग्रामीण क्षेत्रों तक जानकारी पहुंचाने के लिए प्रचार रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया था। माना जा रहा है कि इस पहल से अदालतों में लंबित मामलों का बोझ कम होगा और हजारों लोगों को त्वरित राहत मिलेगी। न्यायिक व्यवस्था को अधिक भरोसेमंद और सुलभ बनाने की दिशा में यह आयोजन महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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