पटना:
बिहार की राजनीति में इन दिनों हलचल तेज हो गई है। इसी बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शुक्रवार को राजभवन पहुंचे और राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान से मुलाकात की। दोनों के बीच करीब 10 मिनट तक बातचीत हुई। सूत्रों के अनुसार यह मुलाकात विदाई प्रोटोकॉल के तहत मानी जा रही है, क्योंकि हाल के दिनों में नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चा तेज हो गई है।
इधर राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। उपेंद्र कुशवाहा ने मुख्यमंत्री आवास पहुंचकर नीतीश कुमार से मुलाकात की। इस दौरान संजय झा भी मौजूद रहे। इस मुलाकात को राज्य की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दूसरी ओर, नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार भी सक्रिय होते दिखाई दे रहे हैं। शुक्रवार को उन्होंने जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा के आवास पर करीब 24 विधायकों के साथ बैठक की। इस बैठक में परिवहन मंत्री श्रवण कुमार सहित कई वरिष्ठ नेता और युवा विधायक शामिल हुए। बैठक में पार्टी के भविष्य और संगठनात्मक स्थिति पर चर्चा होने की जानकारी सामने आई है।
उधर मुख्यमंत्री आवास पर जदयू विधायकों और मंत्रियों की एक अहम बैठक भी आयोजित हुई। सूत्रों के अनुसार बैठक के दौरान कई विधायकों ने नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले पर आपत्ति जताई। इस पर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि विरोध करने की जरूरत नहीं है और वह राज्यसभा जाने के अपने फैसले पर कायम हैं। उन्होंने कहा कि वह दिल्ली से भी बिहार की राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियों पर नजर बनाए रखेंगे।
बैठक में मौजूद विधायक विनय चौधरी के अनुसार चर्चा के दौरान माहौल भावुक हो गया। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री की बात सुनकर कई विधायक भावुक हो गए और उनसे अपना फैसला वापस लेने का आग्रह करने लगे। हालांकि मुख्यमंत्री अपने निर्णय पर अडिग रहे।
इसी दौरान बैठक में निशांत कुमार को सक्रिय राजनीति में लाने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। बताया जा रहा है कि मौजूद विधायकों ने हाथ उठाकर इस प्रस्ताव का समर्थन किया। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार 8 मार्च को निशांत कुमार के जदयू से औपचारिक रूप से जुड़ने की संभावना जताई जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि ऐसा होता है तो जदयू की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हो सकता है, जिसका असर आने वाले समय में बिहार की राजनीति पर भी दिखाई दे सकता है।