कटिहार में इन दिनों बच्चा चोरी की अफवाह ने ऐसा जोर पकड़ा है कि लोग खुद ही जज, जूरी और जल्लाद बनने पर उतारू दिख रहे हैं। हाल ही में रिलीज फिल्म मर्दानी 3 में बच्चा चोरी की कहानी परदे पर क्या आई, शहर में “बच्चा चोर” की चर्चा ने हकीकत में डर और उन्माद का माहौल खड़ा कर दिया है।
ताजा मामला नगर थाना क्षेत्र के अंबेडकर कॉलोनी का है। यहां भीख मांगने वाली तीन महिलाओं को संदिग्ध मानकर भीड़ ने बंधक बना लिया और उनके साथ मारपीट की। लोगों का आरोप था कि महिलाएं बच्चों की रेकी कर रही थीं। स्थिति तब और बिगड़ गई जब आसपास के लोग भी अफवाह सुनकर मौके पर जुटने लगे। हालांकि स्थानीय प्रतिनिधियों और समझदार नागरिकों की पहल पर महिलाओं को भीड़ के चंगुल से छुड़ाया गया, जिससे बड़ी अनहोनी टल गई।
दूसरी घटना मनसाही थाना क्षेत्र की है, जहां मानसिक रूप से अस्वस्थ एक महिला को बच्चा चोर समझकर लोगों ने घेर लिया। माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि हालात बेकाबू होते-होते बचे। सूचना मिलते ही पुलिस पहुंची और स्थिति को संभाला।
इधर, कुछ दिन पहले शहर के दो स्कूलों के सामने कथित तौर पर बच्चा चोरी की कोशिश की चर्चा ने अभिभावकों की चिंता और बढ़ा दी है। हालांकि इन घटनाओं की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई, लेकिन सोशल मीडिया और मौखिक चर्चाओं ने माहौल को और भड़काया है।
एएसपी अभिजीत सिंह ने स्पष्ट कहा है कि बच्चों की सुरक्षा प्रशासन की पहली प्राथमिकता है, लेकिन किसी भी सूरत में कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी। अफवाह फैलाने वालों और मारपीट करने वालों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
कटिहार की ये घटनाएं बड़ा सवाल खड़ा कर रही हैं—क्या डर और अफवाह के नाम पर भीड़ का न्याय सही है? या फिर जरूरत है सतर्कता के साथ समझदारी की? विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता और संयम ही ऐसे हालात में सबसे बड़ी ताकत है। वरना अफवाह की चिंगारी कभी भी बड़े हादसे में बदल सकती है।