अररिया। शिक्षा सेवक/तालीमी मरकज संघ अररिया के बैनर तले शुक्रवार को समाहरणालय परिसर स्थित धरना स्थल पर एक दिवसीय धरना का आयोजन किया गया। धरने में जिले भर से पहुंचे सैकड़ों शिक्षा सेवक और तालीमी मरकज कर्मी शामिल हुए। प्रदर्शन के बाद प्रतिनिधिमंडल ने जिला पदाधिकारी को अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा।
धरना को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा सेवक पिछले 17 वर्षों से विद्यालयों में शैक्षणिक एवं प्रशैक्षणिक कार्यों में लगातार योगदान दे रहे हैं। इसके बावजूद अब तक उन्हें शिक्षक पद पर समायोजन और राज्यकर्मी का दर्जा नहीं दिया गया है। संघ का कहना है कि वे विद्यालयों में नामांकन, उपस्थिति, ई-शिक्षा कोष में डाटा संधारण सहित कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, फिर भी उनकी सेवाओं का समुचित मूल्यांकन नहीं किया गया।
संघ ने आरोप लगाया कि वर्तमान महंगाई के दौर में मानदेय के सहारे परिवार चलाना बेहद कठिन हो गया है। बच्चों के भरण-पोषण और उनकी शिक्षा पर खर्च उठाना चुनौती बनता जा रहा है। कई शिक्षा सेवकों ने कहा कि वर्षों की सेवा के बावजूद भविष्य असुरक्षित बना हुआ है, जिससे मानसिक और आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि मुख्यमंत्री द्वारा विभिन्न मंचों से शिक्षा सेवकों को सरकारी कर्मी बताया गया है, लेकिन अब तक उन्हें आधिकारिक रूप से राज्यकर्मी का दर्जा प्रदान नहीं किया गया। संघ ने मांग की कि उनके लंबे अनुभव, कार्य दक्षता और विद्यालयों में नियमित उपस्थिति को आधार बनाकर शीघ्र समायोजन की प्रक्रिया शुरू की जाए।
धरना स्थल पर मौजूद कर्मियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक पहल नहीं की गई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाई जा रही है, लेकिन उपेक्षा जारी रही तो चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा।
धरना कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ, लेकिन शिक्षा सेवकों के चेहरे पर अपने भविष्य को लेकर चिंता साफ झलक रही थी। अब सबकी नजर प्रशासन और सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी है।