अररिया में संभावित बाढ़ एवं सुखाड़ की पूर्व तैयारियों को लेकर समाहरणालय स्थित परमान सभागार में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता प्रभारी मंत्री डॉ. राम चंद्र प्रसाद ने की। बैठक में तटबंधों की मरम्मत, राहत एवं बचाव कार्यों की तैयारी, पेयजल, बिजली, पशु चिकित्सा सेवाओं तथा सिंचाई व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की गई। अधिकारियों को 15 जून तक सभी क्षतिग्रस्त तटबंधों की मरम्मत हर हाल में पूर्ण करने का निर्देश दिया गया।
अररिया: अररिया जिले में संभावित बाढ़ एवं सुखाड़ की स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए प्रशासनिक तैयारियों की समीक्षा की गई। समाहरणालय स्थित परमान सभागार में आयोजित बैठक में जिला प्रशासन, जनप्रतिनिधियों तथा विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक की शुरुआत राष्ट्रगान के साथ हुई।
बैठक के दौरान अपर समाहर्ता (आपदा प्रबंधन) ने जिले का सामान्य परिचय प्रस्तुत करते हुए पिछले वर्षों में आई बाढ़, वर्षा की स्थिति तथा संवेदनशील क्षेत्रों की जानकारी पीपीटी के माध्यम से दी। संभावित बाढ़ प्रभावित परिवारों एवं व्यक्तियों की अद्यतन सूची तैयार करने पर विशेष जोर दिया गया ताकि आपदा की स्थिति में राहत एवं सहायता कार्यों को तेजी से संचालित किया जा सके।
प्रभारी मंत्री ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। उन्होंने निर्देश दिया कि आम लोगों की सुरक्षा और आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। साथ ही किसी भी आपदा की स्थिति में त्वरित राहत पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया।
तटबंधों की मरम्मत और अवैध खनन पर विशेष निगरानी
बैठक में जिले के विभिन्न तटबंधों की स्थिति की समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि सभी क्षतिग्रस्त तटबंधों की मरम्मत 15 जून तक पूरी कर ली जाए। संबंधित अभियंताओं ने बताया कि मरम्मत कार्य तेजी से चल रहा है और निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा कर लिया जाएगा।
बैठक में पिपरा जमींदारी बांध, मजकुड़ी जहानपुर तटबंध और सुरसर तटबंध की मरम्मत एवं रखरखाव का मुद्दा भी उठाया गया। जिला पदाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक प्रस्ताव तत्काल विभाग को भेजने का निर्देश दिया।
तटबंधों के किनारे होने वाले अवैध खनन को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई। प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों को ऐसे मामलों पर विशेष निगरानी रखने तथा आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।
राहत-बचाव, पेयजल और सिंचाई व्यवस्था पर जोर
बैठक में राहत एवं बचाव कार्यों की तैयारियों की भी विस्तृत समीक्षा हुई। नावों एवं मोटरबोटों की उपलब्धता, नाविकों के भुगतान, लाइफ जैकेट और राहत शिविरों की व्यवस्था पर चर्चा की गई। जानकारी दी गई कि वर्तमान में 135 लाइफ जैकेट उपलब्ध हैं तथा अतिरिक्त 500 लाइफ जैकेट खरीदने की प्रक्रिया चल रही है।
यदि किसी नाविक का भुगतान लंबित है तो उसका तत्काल भुगतान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। सामुदायिक रसोई, बाढ़ आश्रय स्थलों, पेयजल एवं विद्युत आपूर्ति की व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। पशु चारा, पशु चिकित्सा सेवाओं और पशु शिविरों की तैयारी पर भी अधिकारियों ने जानकारी दी।
सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों और अंचल अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि आपदा संबंधी सूचनाएं और लाभुकों की सूची आपदा संपुष्टि पोर्टल पर समय-समय पर अद्यतन की जाए। बैठक के दौरान पलासी अंचलाधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई का भी निर्देश दिया गया।
इसके अलावा सिंचाई व्यवस्था, नहरों की स्थिति तथा संभावित सुखाड़ की परिस्थिति पर चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि किसानों को समय पर सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए नहरों में पानी छोड़ने की तैयारी पूरी कर ली गई है।
फसल क्षति मुआवजा से जुड़े मामलों की समीक्षा करते हुए बताया गया कि प्राप्त सभी आवेदनों का जिला स्तर पर निष्पादन किया जा चुका है और लाभुकों को डीबीटी के माध्यम से सहायता राशि उपलब्ध कराई जा रही है।
बैठक में मुख्यमंत्री ग्रामीण सेतु योजना एवं राज्य योजना के अंतर्गत प्राप्त प्रस्तावों की समीक्षा भी की गई। जिन क्षेत्रों में अब तक पुल निर्माण नहीं हो पाया है, वहां प्राथमिकता सूची तैयार करने का निर्णय लिया गया। जनहित एवं आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए 16 पुलों सहित अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाओं को प्राथमिकता सूची में शामिल करने पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।