अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर 30 बालिकाओं ने सीखी पारंपरिक मधुबनी कला, प्रमाण पत्र व मोमेंटो देकर किया गया सम्मानित
अररिया, 14 मार्च 2026।
कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार तथा जिला प्रशासन अररिया के संयुक्त तत्वावधान में आम्रपाली प्रशिक्षण केंद्र में आयोजित सात दिवसीय मधुबनी चित्रकला कार्यशाला का शनिवार को सफल समापन हो गया। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य बालिकाओं को पारंपरिक कला से जोड़ते हुए उनकी सृजनात्मक प्रतिभा को प्रोत्साहित करना और आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रेरित करना था। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 8 मार्च से 14 मार्च 2026 तक चला, जिसमें कुल 30 बालिकाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
पारंपरिक कला से जुड़ाव का अवसर
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को मधुबनी चित्रकला की विभिन्न शैलियों, विषयों और तकनीकों से परिचित कराया गया। प्रशिक्षण के माध्यम से बालिकाओं को मिथिला की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा तथा इस लोक कला के ऐतिहासिक महत्व की जानकारी भी दी गई। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों ने पूरी लगन के साथ चित्रकला का अभ्यास किया और कई आकर्षक कलाकृतियाँ तैयार कीं।
विशेषज्ञों ने सिखाई चित्रकला की बारीकियाँ
कार्यशाला में ललित कला शिक्षिका श्रद्धा सुमन ने प्रतिभागियों को मधुबनी चित्रकला की बारीकियों से अवगत कराया। उन्होंने पारंपरिक रेखांकन, प्राकृतिक व पारंपरिक रंगों के उपयोग, प्रतीकों एवं आकृतियों के महत्व तथा आधुनिक समय में मधुबनी कला के प्रयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी। प्रशिक्षण के दौरान बालिकाओं ने देव-देवताओं, प्रकृति, सामाजिक विषयों तथा मिथिला संस्कृति से जुड़े कई सुंदर चित्र बनाए।
वहीं शिक्षिका शाइस्ता ने भी प्रशिक्षण के संचालन और प्रतिभागियों के मार्गदर्शन में महत्वपूर्ण सहयोग दिया, जिससे प्रतिभागियों को चित्रों को और बेहतर बनाने में सहायता मिली।
प्रदर्शनी और सम्मान के साथ समापन
कार्यशाला के अंतिम दिन आयोजित समापन समारोह में प्रतिभागियों द्वारा बनाए गए चित्रों की लघु प्रदर्शनी लगाई गई, जिसे उपस्थित लोगों ने सराहा। इस दौरान प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि इस प्रशिक्षण से उन्हें नई कला सीखने का अवसर मिला और वे भविष्य में भी इस कला को आगे बढ़ाना चाहती हैं।
समापन अवसर पर सभी प्रतिभागियों को उनके सफल प्रशिक्षण के लिए प्रशस्ति पत्र एवं मोमेंटो प्रदान कर सम्मानित किया गया। उपस्थित अधिकारियों और अतिथियों ने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएँ लड़कियों की रचनात्मक क्षमता को निखारने और पारंपरिक लोक कलाओं के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
कार्यक्रम का समापन प्रतिभागियों के उत्साह और कला के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा के साथ हुआ।