अररिया जिले के सोनामणि गोदाम क्षेत्र से एक सनसनीखेज वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि एक युवक के हाथ पीछे की ओर मोड़कर रस्सी से बांध दिए गए हैं और कुछ लोग उसे बेरहमी से लाठी-डंडों से पीट रहे हैं। आसपास मौजूद भीड़ तमाशबीन बनी दिखाई दे रही है। हालांकि इस वायरल वीडियो की पुष्टि NAVBIHAR 24 नहीं करता है, लेकिन वीडियो ने क्षेत्र में कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
वीडियो में दिख रहा दृश्य यह संकेत देता है कि कुछ लोगों के मन में कानून का भय कमजोर पड़ता नजर आ रहा है। जिस तरह से युवक को सार्वजनिक रूप से बांधकर पीटा जा रहा है, वह कानून को सीधे तौर पर हाथ में लेने जैसा प्रतीत होता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, पिटाई का शिकार युवक को कुछ लोग ‘मानसिक रूप से अस्वस्थ’ बता रहे हैं, लेकिन किसी भी परिस्थिति में किसी व्यक्ति के साथ इस प्रकार की हिंसा को कानून जायज नहीं ठहराता।
बताया जा रहा है कि यह घटना 20 फरवरी 2026 की है। वीडियो में यह भी स्पष्ट है कि मौके पर भारी भीड़ जमा है, लेकिन किसी ने बीच-बचाव की कोशिश नहीं की। भीड़ में से ही किसी व्यक्ति ने घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया, जिसके बाद मामला चर्चा में आया।
गौरतलब है कि इससे पहले भी 10 अगस्त 2024 को इसी तरह की एक घटना सामने आई थी, जब एक कथित मोटरसाइकिल चोर को पकड़कर उसके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया था। उस समय निजी अंग में मिर्च लगाने का वीडियो वायरल हुआ था। उस मामले में तत्कालीन पुलिस अधीक्षक अमित रंजन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की थी और कई आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। उस कार्रवाई के बाद पुलिस ने स्पष्ट संदेश दिया था कि कानून हाथ में लेने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
वर्तमान घटना को लोग 10 अगस्त 2024 की घटना से जोड़कर देख रहे हैं। फर्क सिर्फ इतना बताया जा रहा है कि पिछली घटना में आम लोगों ने कथित चोर के साथ दुर्व्यवहार किया था, जबकि इस बार पिटाई का शिकार युवक को ‘पागल’ कहकर हिंसा को सही ठहराने की कोशिश की जा रही है। लेकिन कानून में कहीं भी यह प्रावधान नहीं है कि किसी को मानसिक रूप से अस्वस्थ मानकर उसे सार्वजनिक रूप से प्रताड़ित किया जाए।
घटना की पुष्टि के लिए सोनामणि गोदाम थाना के प्रभारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया। दिए गए मोबाइल नंबर 9031827819 पर कई बार कॉल की गई, लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ। स्थानीय लोगों में यह चर्चा भी तेज हो गई कि यदि समय पर पुलिस हस्तक्षेप होता, तो शायद ऐसी घटनाओं पर तत्काल रोक लगाई जा सकती थी।
अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी सुशील कुमार ने बताया कि….
बाद में मामले की जानकारी लेने पर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी सुशील कुमार ने बताया कि घटना सोनामणि गोदाम क्षेत्र की है और इस संबंध में आवेदन दर्ज कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अक्सर ऐसी घटनाओं में पहले वीडियो वायरल होता है, फिर प्रशासन सक्रिय होता है। इस बार भी चर्चा है कि वरीय अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद आवेदन दर्ज हुआ। यदि यह सही है तो यह व्यवस्था पर भी सवाल खड़ा करता है कि क्या बिना दबाव के कार्रवाई संभव नहीं है?
लगातार दो वर्षों में सामने आई ऐसी घटनाएं यह संकेत देती हैं कि समाज के एक वर्ग में कानून से ज्यादा भीड़ की मानसिकता हावी हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि भीड़ द्वारा की जाने वाली हिंसा न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि यह समाज में भय और असुरक्षा का वातावरण भी पैदा करती है।
अब देखना यह होगा कि पुलिस इस मामले में कितनी तेजी से कार्रवाई करती है और क्या 10 अगस्त 2024 की तरह सख्त संदेश दिया जाता है। फिलहाल वायरल वीडियो ने सोनामणि गोदाम क्षेत्र में कानून-व्यवस्था को लेकर बहस तेज कर दी है।