अररिया: जिले के सोनामणि गोदाम क्षेत्र का एक वायरल वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है। वीडियो में एक युवक को हाथ उलटकर रस्सी से बांधा गया है और कुछ लोग उसे लाठी-डंडों से बेरहमी से पीटते नजर आ रहे हैं। यह दृश्य कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। हालांकि इस वायरल वीडियो की पुष्टि NAVBIHAR 24 नहीं करता है, लेकिन वीडियो में दिख रही घटनाएं चिंता पैदा करने वाली हैं।
वीडियो में साफ दिखाई देता है कि युवक को सार्वजनिक रूप से बांधकर प्रताड़ित किया जा रहा है और आसपास बड़ी संख्या में लोग खड़े होकर तमाशबीन बने हुए हैं। भीड़ में से ही किसी ने पूरी घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दिया, जिसके बाद मामला तेजी से चर्चा में आ गया।
स्थानीय लोगों के अनुसार, पिटाई का शिकार युवक को कुछ लोग “पागल” बता रहे हैं। लेकिन किसी भी परिस्थिति में कानून को हाथ में लेना और किसी व्यक्ति के साथ इस तरह की अमानवीय मारपीट करना विधि-सम्मत नहीं है। भारतीय कानून में भीड़ द्वारा सजा देने या सार्वजनिक पिटाई की कोई अनुमति नहीं है।
यह पहली बार नहीं है जब इस तरह की घटना सामने आई हो। इससे पूर्व 10 अगस्त 2024 को भी एक मामला सामने आया था, जिसमें कथित मोटरसाइकिल चोर को पकड़कर उसके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया था। उस घटना का भी वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें आरोपी के साथ अभद्रता और प्रताड़ना की तस्वीरें सामने आई थीं। उस समय तत्कालीन आरक्षी अधीक्षक अमित रंजन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए घटना में शामिल लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया था और दोषियों को जेल भेजा गया था।
घटना की सत्यता जानने के लिए सोनामणि गोदाम थाना प्रभारी से संपर्क करने की कोशिश की गई। दिए गए मोबाइल नंबर पर कई बार कॉल की गई, लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ। इससे भी स्थानीय स्तर पर असमंजस की स्थिति बनी रही।
बाद में जब इस संबंध में अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी सुशील कुमार से जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि घटना सोनामणि गोदाम क्षेत्र की है और इस मामले में आवेदन प्राप्त हो चुका है। पुलिस द्वारा आवेदन दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, प्रारंभ में स्थानीय स्तर पर मामला दर्ज नहीं किया गया था। बाद में वरीय पदाधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद आवेदन दर्ज किया गया। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या बिना उच्चस्तरीय दबाव के इस मामले में कार्रवाई संभव थी या नहीं।
घटना ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि क्या समाज में भीड़तंत्र कानून पर हावी होता जा रहा है। पुलिस की मौजूदगी और कानून का भय यदि समाप्त होता दिखे, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर संकेत है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते ऐसे मामलों में कठोर और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की गई, तो यह प्रवृत्ति और बढ़ सकती है। कानून व्यवस्था बनाए रखना पुलिस और प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है। अब देखना यह है कि वायरल वीडियो में दिख रहे लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ क्या ठोस कार्रवाई की जाती है और क्या पीड़ित युवक को न्याय मिल पाता है।