शिक्षक दिवस के अवसर पर 5 सितंबर 2026 को टाउन हॉल परिसर स्थित लाइब्रेरी में आयोजित सम्मान समारोह में 1980 के दशक में प्राथमिक शिक्षा देने वाले शिक्षकों को खोजकर एक मंच पर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में उनके पूर्व शिष्य और स्थानीय लोग मौजूद रहे। समारोह के दौरान पुराने शिक्षकों और शिष्यों के बीच भावुक मुलाकात भी देखने को मिली।
अररिया: अररिया में शिक्षक दिवस के मौके पर आयोजित एक विशेष सम्मान समारोह ने शिक्षा के पुराने दौर की यादें ताजा कर दीं। टाउन हॉल परिसर स्थित लाइब्रेरी में 5 सितंबर 2026 को आयोजित कार्यक्रम में 1980 के दशक में बच्चों को प्राथमिक शिक्षा देने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया गया।
यह कार्यक्रम केवल सम्मान समारोह तक सीमित नहीं रहा। इसके पीछे उन शिक्षकों को खोजकर एक मंच पर लाने की पहल थी, जिन्होंने अपने समय में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बच्चों को शिक्षा की शुरुआती नींव दी थी। उस दौर में सीमित संसाधनों के बीच पढ़ाई का माहौल तैयार करना शिक्षकों के लिए बड़ी जिम्मेदारी माना जाता था।
कार्यक्रम में पूर्व शिष्यों और स्थानीय लोगों की मौजूदगी भी देखने को मिली। उम्र के इस पड़ाव पर पहुंचे शिक्षकों को जब उनके पुराने विद्यार्थी और परिचित एक साथ मिले तो माहौल भावुक हो गया। कई लोगों ने अपने छात्र जीवन की यादों को साझा करते हुए शिक्षकों के योगदान को याद किया।
सम्मान समारोह का नेतृत्व इंदु शेखर मल्लिक ने किया। आयोजन में डॉ. नैयर हबीब, विष्णु मंडल, गणेश अग्रवाल, श्याम शर्मा, संजय भगत, मनीष राय, दीपक सिन्हा, इजराइल आलम और आरफीन की भूमिका रही।
समारोह में कमलानंद ठाकुर, भोला पंडित प्रणयी, मास्टर मोहम्मद मोहसिन साहब और मुजाहिर हुसैन को सम्मानित किया गया। आयोजकों का कहना था कि इन शिक्षकों ने अपने समय में बच्चों को केवल किताबों की शिक्षा नहीं दी, बल्कि उनके व्यक्तित्व और भविष्य को दिशा देने में भी भूमिका निभाई।
कार्यक्रम में मौजूद लोगों के लिए यह अवसर इसलिए भी खास रहा क्योंकि कई वर्षों बाद पुराने गुरुजनों और उनके शिष्यों का एक साथ मिलना संभव हुआ। शिक्षक दिवस पर आयोजित इस पहल ने यह संदेश दिया कि शिक्षा के क्षेत्र में किए गए पुराने योगदान को समय बीतने के साथ भुलाया नहीं जाना चाहिए।
1980 के दशक में जिन शिक्षकों ने बच्चों को प्राथमिक शिक्षा की शुरुआत कराई, उन्हीं में से कुछ शिक्षकों को उनके पुराने विद्यार्थियों और समाज की ओर से सम्मान दिया गया। समारोह के दौरान गुरु-शिष्य संबंधों की पुरानी यादें भी सामने आईं।
शिक्षकों के सम्मान के इस आयोजन ने एक बार फिर यह सवाल सामने रखा कि समाज अपने पुराने शिक्षकों के योगदान को किस तरह याद रख सकता है। अररिया में आयोजित यह कार्यक्रम इसी सोच की एक पहल के रूप में सामने आया, जहां पुराने शिक्षकों को खोजकर सम्मान के साथ एक मंच पर लाया गया।
शिक्षक दिवस पर आयोजित इस समारोह में सम्मान पाने वाले शिक्षकों के प्रति पूर्व शिष्यों और उपस्थित लोगों ने सम्मान व्यक्त किया। आयोजन का उद्देश्य पुराने शिक्षकों के योगदान को याद करना और नई पीढ़ी के सामने गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व को रखना रहा।