अररिया में ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण की दिशा में चलाए गए पांडुलिपि सर्वेक्षण एवं डिजिटलीकरण अभियान के अंतिम दिन 24 हस्तलिखित पांडुलिपियों को डिजिटल रूप में सुरक्षित किया गया। ये पांडुलिपियां फारबिसगंज क्षेत्र से प्राप्त हुई हैं और इन्हें ज्ञान भारतम ऐप पर अपलोड किया गया है। अभियान का उद्देश्य जिले में मौजूद पुरानी और महत्वपूर्ण पांडुलिपियों का दस्तावेजीकरण कर उन्हें आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित करना है।
अररिया। जिले में सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के लिए चलाए जा रहे पांडुलिपि सर्वेक्षण एवं डिजिटलीकरण अभियान के तहत अंतिम दिन 24 हस्तलिखित पांडुलिपियां प्राप्त हुईं। इन सभी पांडुलिपियों को डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित करते हुए ज्ञान भारतम ऐप पर अपलोड किया गया है। जिला कला एवं संस्कृति विभाग के अनुसार, यह प्रक्रिया जिले की पुरानी सांस्कृतिक संपदा को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी सान्याल कुमार ने बताया कि प्राप्त पांडुलिपियां फारबिसगंज के संग्रहक क्रांति कुंवर से मिली हैं। ये सभी पांडुलिपियां संस्कृत भाषा में लिखी गई हैं और इनमें ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व से जुड़ी सामग्री मौजूद है। डिजिटलीकरण के माध्यम से इन दुर्लभ दस्तावेजों को सुरक्षित रखने के साथ-साथ शोधकर्ताओं और आम लोगों तक पहुंचाने में सहायता मिलेगी।
उन्होंने बताया कि अभियान की निर्धारित अवधि के दौरान जिले के विभिन्न क्षेत्रों में सर्वेक्षण किया गया। इस दौरान लोगों से उनके घरों और निजी संग्रह में सुरक्षित पुरानी पांडुलिपियों की जानकारी जुटाई गई। विभाग की ओर से लोगों को अपनी पुरानी हस्तलिखित सामग्री उपलब्ध कराने के लिए जागरूक भी किया गया।
176 पांडुलिपियों का पहले हो चुका है सर्वेक्षण
पांडुलिपि संरक्षण अभियान के तहत जिले में अब तक कुल 176 पांडुलिपियों का सर्वेक्षण किया जा चुका है। इनमें 75 वर्ष या उससे अधिक पुरानी हस्तलिखित सामग्री शामिल है। इन पांडुलिपियों में साहित्य, धर्म, इतिहास और संस्कृति से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां मौजूद हैं।
विभाग का कहना है कि ऐसी पांडुलिपियां क्षेत्र के सामाजिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विकास को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने से इनका संरक्षण लंबे समय तक किया जा सकेगा और भविष्य में शोध कार्यों के लिए भी उपयोगी सामग्री उपलब्ध होगी।
डिजिटल संरक्षण से मिलेगी नई पहचान
पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण का मुख्य उद्देश्य दुर्लभ दस्तावेजों को सुरक्षित रखना और उन्हें आधुनिक तकनीक के माध्यम से संरक्षित करना है। विभाग के अनुसार, बिहार की सांस्कृतिक विरासत को डिजिटल मंच पर उपलब्ध कराने से इन धरोहरों को व्यापक पहचान मिलेगी।
अभियान के अंतिम चरण में प्राप्त हुई पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण से जिले की सांस्कृतिक संपदा के संरक्षण प्रयासों को मजबूती मिली है। विभाग आगे भी ऐसी ऐतिहासिक सामग्री की पहचान और संरक्षण के लिए प्रयास जारी रखने की बात कही है।