राज्यसभा चुनाव में वोट नहीं देने से नाराज कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने फारबिसगंज स्टेशन चौक पर प्रदर्शन किया। रहमत अली के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने विधायक मनोज विश्वास का पुतला दहन कर कड़ी नाराजगी जताई।
अररिया:- जिले के फारबिसगंज में सोमवार को राज्यसभा चुनाव में मतदान से अनुपस्थित रहने के मुद्दे पर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं का गुस्सा खुलकर सामने आया। नाराज कार्यकर्ताओं ने शहर के स्टेशन चौक के पास विधायक मनोज विश्वास के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया और उनका पुतला दहन कर विरोध जताया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने विधायक के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की।
राज्यसभा चुनाव के बाद बढ़ा राजनीतिक तापमान
बिहार में सोमवार को हुए राज्यसभा चुनाव में एनडीए ने सभी पांच सीटों पर जीत दर्ज कर ली। वहीं महागठबंधन के उम्मीदवारों को करारी हार का सामना करना पड़ा। इस हार के बाद विपक्षी खेमे में नाराजगी और असंतोष देखने को मिला। जानकारी के अनुसार कांग्रेस के तीन विधायक और राजद का एक विधायक मतदान में शामिल नहीं हुआ, जिसके कारण विपक्षी दलों के भीतर सवाल खड़े होने लगे हैं।
स्टेशन चौक पर सैकड़ों कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन
फारबिसगंज में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बिहार प्रदेश कांग्रेस के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के महासचिव रहमत अली के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान सैकड़ों कार्यकर्ता स्टेशन के सामने जमा हुए और विधायक के खिलाफ नारेबाजी करते हुए पुतला दहन किया।
कार्यकर्ताओं का आरोप है कि विधायक की अनुपस्थिति ने विपक्ष की स्थिति कमजोर कर दी, जिससे राज्यसभा चुनाव में महागठबंधन को नुकसान उठाना पड़ा।
गांव-गांव में विरोध की चेतावनी
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी कि विधायक को फारबिसगंज विधानसभा क्षेत्र के गांवों और गलियों में घुसने नहीं दिया जाएगा। कार्यकर्ताओं का कहना था कि जनप्रतिनिधि का कर्तव्य होता है कि वह पार्टी की नीति और जनता की उम्मीदों के अनुरूप निर्णय ले।
प्रदर्शन के दौरान क्षेत्र में कुछ समय के लिए राजनीतिक माहौल काफी गर्म दिखाई दिया। हालांकि प्रशासनिक स्तर पर स्थिति पर नजर रखी गई और कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त हो गया।
राज्यसभा चुनाव के बाद सामने आया यह विरोध प्रदर्शन स्थानीय राजनीति में नई हलचल का संकेत दे रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे को लेकर विपक्ष के भीतर और बहस तेज हो सकती है।
