प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय ने सुनाया फैसला, 20 हजार अर्थदंड और अतिरिक्त सजा का प्रावधान
अररिया। जिले के चर्चित 1998 डेंगा चौक हत्याकांड में 28 साल बाद न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 15 आरोपियों को दोषी करार दिया है। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश गुंजन पांडेय की अदालत ने सभी दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही प्रत्येक पर 20 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया है। जुर्माना नहीं देने पर छह महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। इस मामले में कुल 21 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया गया था, जिनमें से 6 की मौत सुनवाई के दौरान ही हो चुकी है।
सजा पाने वाले सभी दोषियों की उम्र 70 वर्ष से अधिक है, जिनमें सबसे अधिक उम्र 89 वर्षीय हाजी रोजिद की है। अदालत ने सभी को भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी पाया, जिनमें दंगा, हत्या, हत्या का प्रयास और अन्य गंभीर अपराध शामिल हैं।
डेंगा चौक पर हुई थी निर्मम वारदात
यह मामला पलासी थाना क्षेत्र के कुमिहया रामनगर टोला का है। 3 मई 1998 को सूचक इबनुल हक द्वारा दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, डेंगा चौक स्थित हरि लाल यादव की दुकान पर अचानक हमला किया गया था। घटना के दौरान जब अलीमुद्दीन बीच-बचाव के लिए पहुंचे, तब 30 से 40 लोगों की भीड़ ने उन पर धारदार हथियारों और लाठियों से हमला कर दिया। इस हमले में अलीमुद्दीन की मौके पर ही मौत हो गई।
हमलावरों ने घटना के बाद शव को उठाने में भी बाधा डाली, जिससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई थी। इस वारदात ने उस समय पूरे इलाके में सनसनी फैला दी थी।
गवाहों और साक्ष्यों से साबित हुआ अपराध
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 13 गवाहों के बयान पेश किए। सरकारी वकील रामानंद मंडल ने सशक्त तरीके से पक्ष रखा, जबकि बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मंजूर आलम ने दलीलें दीं।
लंबी सुनवाई और साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची कि आरोपियों ने पूर्व नियोजित साजिश के तहत इस हत्या को अंजाम दिया था। गवाहों की सुसंगत गवाही और साक्ष्यों की मजबूती ने इस पुराने मामले को निर्णायक मोड़ तक पहुंचाया।
इस फैसले को न्याय व्यवस्था में विश्वास बहाल करने वाला माना जा रहा है, जहां दशकों बाद भी दोषियों को सजा मिली।