धान की फसल में भूरा पत्ती फुदका यानी ब्राउन प्लांटहॉपर (BPH) का प्रकोप फसल के लिए नुकसानदायक हो सकता है। यह कीट पौधे के तने के निचले हिस्से से रस चूसता है। अधिक प्रकोप होने पर खेत में पौधे पीले होकर सूखने लगते हैं और हॉपर बर्न की स्थिति बन सकती है।
अररिया: धान की फसल में भूरा पत्ती फुदका (BPH) प्रमुख कीट समस्याओं में शामिल है। यह कीट सामान्यतः धान के पौधे के तने के निचले हिस्से में समूह के रूप में पाया जाता है और वहीं से पौधे का रस चूसकर नुकसान पहुंचाता है। समय पर पहचान और नियंत्रण नहीं होने पर इसका असर उत्पादन पर भी पड़ सकता है।
किसानों के अनुसार खेत में कुछ स्थानों पर पौधों का अचानक पीला पड़ना इस कीट के प्रकोप का संकेत हो सकता है। बाद में पौधे मुरझाने लगते हैं और अधिक प्रकोप होने पर गोलाकार या अनियमित पीले-भूरे सूखे धब्बे दिखाई दे सकते हैं। धीरे-धीरे प्रभावित पौधे पूरी तरह सूख जाते हैं। इस स्थिति को हॉपर बर्न कहा जाता है। खेत में पौधे को तने के पास से हल्का हिलाने पर छोटे भूरे रंग के कीट दिखाई देना भी BPH की मौजूदगी का संकेत हो सकता है।
प्रबंधन के लिए इमिडाक्लोप्रिड 17.8% SL की 0.3 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी या थायमेथोक्साम 25% WG की 0.25 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव किया जा सकता है। इसके अलावा Cartap Hydrochloride 50% SP की 400 ग्राम प्रति एकड़ अथवा फिप्रोनिल 5% SC की 400 मिलीलीटर प्रति एकड़ की अनुशंसित मात्रा का पानी में घोल बनाकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है।
कीटनाशक का छिड़काव करते समय पौधे के निचले हिस्से और तने के आधार तक दवा का पहुंचना जरूरी है, क्योंकि BPH मुख्य रूप से इसी स्थान पर रहता है। किसानों को एक ही रसायन का बार-बार इस्तेमाल नहीं करने और उत्पाद के लेबल पर दिए निर्देशों के अनुसार मात्रा व सुरक्षा सावधानियों का पालन करने की सलाह दी गई है।
प्रारंभिक अवस्था में खेत की नियमित निगरानी कर प्रभावित पौधों की पहचान करने से नुकसान को कम किया जा सकता है।