मां दुर्गा का आगमन इस बार डोली पर और प्रस्थान हाथी पर, नवरात्र को लेकर अररिया में पूजा-अर्चना की तैयारियां तेज
अररिया। जिले में बसंत नवरात्र को लेकर श्रद्धा और उत्साह का माहौल बनने लगा है। गुरुवार से कलश स्थापना के साथ नवरात्र का शुभारंभ होगा और पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की जाएगी। नवरात्र को लेकर शहर के मंदिरों और घरों में तैयारियां तेज हो गई हैं। वहीं पूजा सामग्री की खरीदारी के लिए बाजारों में भीड़ बढ़ने लगी है।
बाजारों में बढ़ी रौनक, पूजा सामग्री की खरीदारी तेज
नवरात्र को लेकर शहर के विभिन्न बाजारों में बरतन, पूजन सामग्री, फल और फूल की दुकानों पर खरीदारों की अच्छी-खासी भीड़ देखी जा रही है। अधिकांश श्रद्धालु अपने घरों में कलश स्थापना कर मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं। इसी कारण बाजारों में पूजा सामग्री की मांग अचानक बढ़ गई है। मंदिरों और घरों में साफ-सफाई तथा सजावट का काम भी तेजी से चल रहा है।
डोली पर होगा मां दुर्गा का आगमन
विश्व प्रसिद्ध मां खड्गेश्वरी महाकाली मंदिर के साधक नानु बाबा के अनुसार इस बार चैत्र नवरात्रि में मां दुर्गा का आगमन डोली पर हो रहा है, जबकि उनका प्रस्थान हाथी पर होगा। शास्त्रों के अनुसार देवी का वाहन भविष्य के संकेतों को दर्शाता है। डोली या पालकी पर माता का आगमन सामान्य तौर पर शुभ संकेत नहीं माना जाता और इसे आने वाले समय में कठिन परिस्थितियों का संकेत माना जाता है। हालांकि भक्तों के लिए यह पर्व आस्था और शक्ति की साधना का महत्वपूर्ण अवसर होता है।
काली मंदिर में विशेष पूजा का आयोजन
नानु बाबा ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी मां खड्गेश्वरी महाकाली मंदिर में नवरात्र के दौरान विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। मंदिर में षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी और महानवमी के दिन महाभोग लगाया जाएगा। नवरात्र के पहले दिन से ही मंदिर में प्रतिदिन विशेष पूजा का आयोजन होगा और हर रात आठ बजे आरती और पुष्पांजलि दी जाएगी, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं।
रामनवमी का भी विशेष महत्व
नवरात्र के अंतिम दिन रामनवमी का पर्व मनाया जाएगा। हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को भगवान राम का जन्म हुआ था। मान्यता है कि त्रेतायुग में अधर्म के नाश और धर्म की स्थापना के लिए भगवान विष्णु ने राम के रूप में अवतार लिया था। इसी कारण इस दिन देशभर में राम जन्मोत्सव मनाया जाता है और मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
नौ दिनों तक नौ रूपों की होगी
पूजा 19 मार्च (गुरुवार)- प्रतिपदा, मां शैलपुत्री की पूजा व घटस्थापना 20 मार्च (शुक्रवार)- द्वितीया, मां ब्रह्मचारिणी की पूजा 21 मार्च (शनिवार)- तृतीया, मां चंद्रघंटा की पूजा 22 मार्च (रविवार)- चतुर्थी, मां कूष्मांडा की पूजा 23 मार्च (सोमवार)- पंचमी, स्कंदमाता की पूजा 24 मार्च (मंगलवार)- षष्ठी, मां कात्यायनी की पूजा 25 मार्च (बुधवार)- सप्तमी, मां कालरात्रि की पूजा 26 मार्च (गुरुवार)- अष्टमी, मां महागौरी की पूजा और दुर्गा अष्टमी 27 मार्च (शुक्रवार)- रामनवमी, कन्या पूजन और नवरात्र का समापन
