अररिया/पटना: बिहार विधानसभा में फारबिसगंज की समस्याओं को प्रमुखता से उठाते हुए विधायक मनोज विश्वास ने सरकार के समक्ष मांगों की लंबी सूची रखी। उन्होंने साफ कहा कि किसी भी राज्य की शांति, सुरक्षा और कानून-व्यवस्था उसकी बुनियाद होती है। यदि नागरिक खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करेंगे तो विकास की कोई भी योजना धरातल पर सफल नहीं हो सकती।
विधानसभा में अपने संबोधन के दौरान उन्होंने कहा कि राज्य में पुलिस व्यवस्था को मजबूत करना समय की सबसे बड़ी जरूरत है। तेजी से बढ़ रहे साइबर क्राइम पर चिंता जताते हुए उन्होंने हर थाने में साइबर पदाधिकारी की तैनाती की मांग की। उनका कहना था कि डिजिटल युग में अपराध के तरीके बदल चुके हैं, ऐसे में पुलिस तंत्र को भी तकनीकी रूप से सशक्त करना अनिवार्य है।
विधायक ने विशेष रूप से सूखा नशा के बढ़ते प्रचलन पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित रखने के लिए नशे पर सख्त नियंत्रण जरूरी है। सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण फारबिसगंज में नशे की तस्करी तेजी से फैल रही है। इस पर रोक लगाने के लिए विशेष अभियान और निगरानी व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि यदि कहीं भी मिलीभगत की शिकायत है तो उस पर भी कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
फारबिसगंज की भौगोलिक और व्यावसायिक स्थिति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह इलाका व्यापारिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन यहां जाम की समस्या स्थायी रूप ले चुकी है। बाजार और मुख्य सड़कों पर यातायात व्यवस्था चरमरा जाती है। ऐसे में उन्होंने गृह विभाग से यातायात थाना स्थापित करने की मांग की, ताकि शहर को जाम से राहत मिल सके।
उन्होंने यह भी बताया कि कई थानों की गश्ती गाड़ियां अक्सर खराब रहती हैं, जिससे अपराध नियंत्रण में बाधा आती है। गश्ती व्यवस्था को दुरुस्त करने और संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
प्रशासनिक ढांचे पर बात करते हुए विधायक ने कहा कि फारबिसगंज अनुमंडल में 31 पंचायत, दो नगर परिषद और एक नगर पंचायत शामिल हैं। क्षेत्र का दायरा बड़ा है और अपराध की घटनाओं में वृद्धि देखी जा रही है। ऐसी स्थिति में फारबिसगंज को पुलिस जिला घोषित किया जाना चाहिए, ताकि स्वतंत्र पुलिस प्रशासन के माध्यम से त्वरित कार्रवाई संभव हो सके। साथ ही सिमराहा को नया प्रखंड बनाने की मांग भी रखी गई, जिससे स्थानीय प्रशासनिक कार्यों में गति आए।
अपने वक्तव्य के अंत में उन्होंने कहा कि अररिया में वर्तमान पुलिस अधीक्षक बेहतर कार्य कर रहे हैं, लेकिन सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण अतिरिक्त सतर्कता जरूरी है। विशेषकर सूखा नशा और अन्य आपराधिक गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए ठोस रणनीति बनाई जानी चाहिए।
विधानसभा में उठी इन मांगों के बाद अब नजर सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी है कि फारबिसगंज की इन जमीनी समस्याओं पर कितनी शीघ्र और प्रभावी कार्रवाई होती है।