अररिया। शहरी क्षेत्र में अब खुले में मांस बिक्री करने वालों पर सख्त कार्रवाई तय है। नगर विकास एवं आवास विभाग ने नई गाइडलाइन जारी कर स्पष्ट कर दिया है कि बिना लाइसेंस मांस, मछली या मुर्गा बेचने की अनुमति नहीं होगी। नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित दुकानदारों पर पांच हजार रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है।
अररिया नगर परिषद ने इस आदेश को तत्काल प्रभाव से लागू करने की घोषणा की है। परिषद प्रशासन का कहना है कि अब शहर में अव्यवस्थित ढंग से सड़क किनारे मांस बेचने की प्रवृत्ति पर पूरी तरह रोक लगेगी।
पहले भी था प्रतिबंध, लेकिन नहीं हो रहा था पालन
शहरी क्षेत्र में खुले में मांस बेचने पर पहले से ही प्रतिबंध लागू था, लेकिन इसका समुचित पालन नहीं हो रहा था। बाजारों और सड़कों के किनारे कई दुकानदार खुले में मटन, मछली और चिकन बेचते देखे जाते थे। अधिकांश विक्रेताओं के पास वैध लाइसेंस भी नहीं था। इससे न केवल स्वच्छता पर सवाल उठ रहे थे, बल्कि आम लोगों के स्वास्थ्य को भी खतरा बना हुआ था।
नगर परिषद के अनुसार, कई बार मौखिक चेतावनी दी गई, लेकिन हालात में अपेक्षित सुधार नहीं दिखा। अब विभागीय निर्देश के बाद सख्ती से कार्रवाई की तैयारी है।
नई गाइडलाइन में क्या है खास
नई गाइडलाइन के तहत मांस, मछली और मुर्गा बेचने वाले सभी दुकानदारों को लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। केवल लाइसेंसधारी दुकानदारों को ही बिक्री की अनुमति दी जाएगी। इसके अलावा दुकानों को पर्दे या शीशे से ढंकना जरूरी होगा, ताकि मांस बाहर से दिखाई न दे।
सड़क किनारे खुले में मांस लटकाकर बेचने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। दुकानों में काले शीशे लगाने और स्वच्छता मानकों का पालन करने का भी निर्देश दिया गया है। नियमों के उल्लंघन की स्थिति में जुर्माना के साथ-साथ अन्य कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
जागरूकता अभियान भी चलाएगा नगर परिषद
नगर परिषद प्रशासन का कहना है कि पूरे नगर क्षेत्र में नई गाइडलाइन के अनुपालन के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। माइकिंग और प्रचार-प्रसार के माध्यम से दुकानदारों को नियमों की जानकारी दी जा रही है।
कार्यपालक पदाधिकारी चन्द्रराज प्रकाश ने स्पष्ट किया कि विभागीय गाइडलाइन का सख्ती से पालन कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि खुले में मीट और मछली की बिक्री अब किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगी। सभी विक्रेताओं को नियमानुसार लाइसेंस लेकर ही व्यापार करना होगा।
प्रशासन की इस पहल को शहर में स्वच्छता और स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। अब देखना यह है कि नई व्यवस्था जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी साबित होती है और नियमों का पालन किस हद तक सुनिश्चित किया जा पाता है।