मधुबनी जिले के सहारघाट निवासी एक शिक्षक की सेवा समाप्ति के मामले को लेकर बिहार प्रदेश खत्री सभा ने बिहार राज्य अल्पसंख्यक आयोग से हस्तक्षेप की मांग की है। सभा का आरोप है कि शिक्षक को अल्पसंख्यक खत्री (पंजाबी सिख) समुदाय से होने के कारण विभागीय स्तर पर प्रताड़ित किया गया और अंततः विद्यालय से हटा दिया गया।
पटना। बिहार प्रदेश खत्री सभा ने मधुबनी जिले के सहारघाट निवासी शिक्षक संजय सिंह खत्री की सेवा समाप्ति के मामले को बिहार राज्य अल्पसंख्यक आयोग के समक्ष उठाया है। सभा के अध्यक्ष शम्मी कपूर ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि संजय सिंह खत्री पिछले चार वर्षों से शिक्षा विभाग में शिक्षक के रूप में कार्यरत थे।
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, शिक्षक ने बिहार प्रदेश खत्री सभा को अपनी समस्या से अवगत कराया। उनका आरोप है कि अल्पसंख्यक खत्री (पंजाबी सिख) समुदाय से होने के कारण उन्हें विभागीय स्तर पर लगातार प्रताड़ना का सामना करना पड़ा और बाद में विद्यालय से हटा दिया गया। सभा ने इसे गंभीर मामला बताते हुए न्याय दिलाने की मांग की है।
शम्मी कपूर ने बताया कि इस विषय को लेकर उन्होंने बिहार राज्य अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष लखविंदर सिंह लक्क्खा से मुलाकात की। बैठक के दौरान आयोग के अध्यक्ष गुलाम रसूल बलियावी के साथ भी मामले पर चर्चा की गई। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, आयोग की ओर से संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी करने का आश्वासन दिया गया है।
प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि आयोग के उपाध्यक्ष ने भरोसा दिलाया कि बिहार में खत्री–पंजाबी समाज के किसी भी व्यक्ति के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि यदि एक सप्ताह के भीतर मामले का समाधान नहीं होता है, तो वे मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से वार्ता कर पीड़ित शिक्षक को न्याय दिलाने का प्रयास करेंगे।
बिहार प्रदेश खत्री सभा ने बिहार राज्य अल्पसंख्यक आयोग और उसके पदाधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उम्मीद जताई है कि आयोग के हस्तक्षेप से मामले का निष्पक्ष समाधान होगा और संबंधित शिक्षक को न्याय मिलेगा।
सभा ने यह भी कहा कि वह भविष्य में भी बिहार के खत्री–पंजाबी समाज से जुड़े लोगों की समस्याओं को संबंधित मंचों तक पहुंचाने और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए प्रयास जारी रखेगी।
नोट: यह समाचार बिहार प्रदेश खत्री सभा द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति और उसमें किए गए दावों पर आधारित है। संबंधित विभाग की ओर से इस मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी है।