अररिया। आगामी होली और पवित्र माह रमजान को लेकर बुधवार को अररिया अनुमंडल कार्यालय में शांति समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता अनुमंडल पदाधिकारी बलबीर दास ने की। बैठक का मुख्य उद्देश्य त्योहारों के दौरान जिले में सामाजिक सौहार्द, आपसी भाईचारा और शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखना था, ताकि सभी समुदाय अपने-अपने पर्व प्रेम और सद्भाव के साथ मना सकें।
बैठक में पुलिस अनुमंडल पदाधिकारी सुशील कुमार, डीसीएलआर एस. प्रतीक, अंचलाधिकारी अजय कुमार, नगर थाना अध्यक्ष मनीष कुमार, नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी चंद्र राज प्रकाश सहित प्रशासन और पुलिस विभाग के कई वरीय अधिकारी उपस्थित रहे। इसके अलावा उपमुख्य पार्षद, सद्भावना मंच के सदस्य, वार्ड पार्षद और पूर्व वार्ड पार्षदों ने भी भाग लेकर अपने सुझाव रखे।
बैठक को संबोधित करते हुए अनुमंडल पदाधिकारी बलबीर दास ने कहा कि होली और रमजान दोनों पर्व सामाजिक एकता, आपसी सम्मान और मानवता का संदेश देते हैं। अररिया की पहचान हमेशा से गंगा-जमुनी तहजीब के रूप में रही है और इसे बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और शांति व्यवस्था बनाए रखने में प्रशासन का सहयोग करें।
पुलिस अनुमंडल पदाधिकारी सुशील कुमार ने जानकारी दी कि त्योहारों के दौरान संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की जाएगी। साथ ही नियमित गश्ती, फ्लैग मार्च और सोशल मीडिया की निगरानी की जाएगी, ताकि किसी भी भ्रामक या भड़काऊ सूचना पर समय रहते कार्रवाई हो सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून व्यवस्था भंग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में मौजूद जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों के सदस्यों ने प्रशासन को पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। वक्ताओं ने कहा कि होली और रमजान के दौरान सभी लोग एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करें। जबरन रंग-गुलाल लगाने, आपत्तिजनक टिप्पणी या भड़काऊ गतिविधियों से बचने की अपील की गई।
समिति ने यह भी निर्णय लिया कि स्थानीय स्तर पर मोहल्ला बैठकें आयोजित कर लोगों को जागरूक किया जाएगा। धार्मिक स्थलों और जुलूस मार्गों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी।
बैठक के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने एक स्वर में संकल्प लिया कि अररिया में शांति, सद्भाव और सामाजिक समरसता की मिसाल कायम रखते हुए त्योहार मनाए जाएंगे।
त्योहारों के इस संवेदनशील समय में प्रशासन और समाज की संयुक्त पहल को सकारात्मक कदम माना जा रहा है। अब देखना होगा कि आमजन भी इस अपील को कितनी गंभीरता से लेते हैं और अररिया की सौहार्दपूर्ण परंपरा को आगे बढ़ाते हैं।