प्रदीप कुमार नायक
स्वतंत्र लेखक एवं पत्रकार
मधुबनी:- 14 फरवरी को मातृ-पितृ पूजन दिवस के रूप में मनाने को लेकर सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों द्वारा व्यापक जागरूकता अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है। इस पहल का उद्देश्य युवाओं को भारतीय संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और पारंपरिक आदर्शों से जोड़ना बताया गया है। स्वतंत्र लेखक एवं पत्रकार प्रदीप कुमार नायक ने इस संदर्भ में कहा कि वर्तमान समय में वैलेंटाइन डे का बढ़ता प्रभाव समाज के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है और इसके विकल्प के रूप में मातृ-पितृ पूजन दिवस को अपनाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कंपनियां अपने व्यापारिक हितों को बढ़ाने के लिए वैलेंटाइन डे का प्रचार-प्रसार करती हैं। जनवरी महीने से ही विभिन्न माध्यमों में इस पर्व को बढ़ावा दिया जाता है, जिससे बाजार में विदेशी उत्पादों की बिक्री में भारी वृद्धि होती है। उनके अनुसार इस प्रवृत्ति से युवाओं का ध्यान पारिवारिक संस्कारों से भटक रहा है, जो समाज के लिए दीर्घकालिक रूप से हानिकारक हो सकता है।
अभियान से जुड़े लोगों का कहना है कि भारतीय परंपरा में माता-पिता को सर्वोच्च स्थान दिया गया है और युवाओं को अपने जीवन में उनके योगदान को समझने की जरूरत है। उनका तर्क है कि माता-पिता ने बच्चों के पालन-पोषण, शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य के लिए निरंतर त्याग किया है, इसलिए उनके प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करना हर व्यक्ति का कर्तव्य है। इसी सोच को मजबूत करने के लिए 14 फरवरी को मातृ-पितृ पूजन दिवस के रूप में मनाने की पहल की जा रही है।
जानकारी के अनुसार, सनातन संस्कृति से जुड़े संतों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने वर्ष 2006 से इस दिवस को मनाने की शुरुआत की थी। धीरे-धीरे यह अभियान देश के विभिन्न हिस्सों में फैलता गया और अब इसे वैश्विक स्तर पर भी मनाए जाने का दावा किया जा रहा है। समर्थकों का कहना है कि इस अभियान के जरिए युवाओं को पाश्चात्य अंधानुकरण से दूर रखते हुए उन्हें अपने परिवार और समाज के प्रति जिम्मेदार बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
अभियान के तहत स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक संस्थाओं में विशेष कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई गई है, जहां युवाओं को माता-पिता के प्रति सम्मान व्यक्त करने और उनके आशीर्वाद लेने के लिए प्रेरित किया जाएगा। आयोजकों ने अपील की है कि समाज के सभी वर्ग इस पहल में भाग लें और पारिवारिक मूल्यों को मजबूत करने की दिशा में आगे आएं।
हालांकि, कुछ सामाजिक विश्लेषकों का मानना है कि युवाओं के बदलते नजरिए और वैश्वीकरण के दौर में सांस्कृतिक संतुलन बनाए रखना जरूरी है। उनका कहना है कि परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन बनाते हुए समाज को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।
इस बीच, अभियान से जुड़े लोगों ने देशवासियों से आग्रह किया है कि वे 14 फरवरी को वैलेंटाइन डे के बजाय मातृ-पितृ पूजन दिवस मनाकर माता-पिता का सम्मान करें और उनसे आशीर्वाद प्राप्त करें। उनका कहना है कि यह पहल युवाओं को एक नई दिशा देने और समाज में नैतिक मूल्यों को पुनर्स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।